मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मिले NCP के दो सांसद, नवान्न में SIR पर हुई विस्तृत चर्चा

कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद एनसीपीआई के दो सांसद शनिवार को नवान्न पहुंचे। मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहेर खान और जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
एनसीपीआई सूत्रों के अनुसार, मुर्शिदाबाद में एसआईआर के कारण सामने आ रही समस्याओं को दोनों सांसदों ने मुख्यमंत्री के सामने रखा। इसके साथ ही उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों की विभिन्न समस्याओं और लोगों की मांगों पर भी चर्चा की।
इन दोनों सांसदों की मुख्यमंत्री से मुलाकात को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुछ दिन पहले अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और बहरामपुर के सांसद यूसुफ पठान ने एनडीए और भाजपा से दूरी बनाए रखने की बात कही थी। एनडीए की बैठक में एनसीपीआई के बाकी सांसद शामिल हुए थे, लेकिन ये तीनों उसमें नहीं पहुंचे थे। इसके बाद पार्टी में टूट की अटकलें तेज हो गई थीं।
हालांकि, इसके बाद तीनों सांसदों ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की। उनके साथ बीरभूम की सांसद शताब्दी राय और असित माल भी मौजूद थे। इसके अगले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर आयोजित एनडीए सांसदों के नाश्ते में भी वे शामिल हुए।
इन सांसदों ने साफ किया था कि वे भाजपा या एनडीए के साथ नहीं हैं, लेकिन अपने क्षेत्र के विकास और जनता की मांगों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के साथ सहयोग करेंगे। इसी सिलसिले में शनिवार को दोनों सांसदों के नवान्न पहुंचने को देखा जा रहा है।
दरअसल, एसआईआर के बाद मुर्शिदाबाद में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप है। कई नाम अभी भी विचाराधीन हैं। उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इन मामलों के निपटारे के लिए न्यायाधिकरण गठित किया है। हालांकि, आरोप है कि न्यायाधिकरण में मामलों की सुनवाई काफी धीमी गति से हो रही है।
इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल भी नवान्न पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर प्रत्येक जिले में न्यायाधिकरण गठित करने की मांग की थी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि एसआईआर से जुड़े मामले अदालत के अधिकार क्षेत्र में हैं और राज्य सरकार इसमें सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि न्यायाधिकरण में मामला लंबित रहने के दौरान किसी व्यक्ति को सरकारी सामाजिक योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा। लेकिन जिन लोगों का नाम एसआईआर में हट गया है और जिन्होंने न्यायाधिकरण में आवेदन नहीं किया है, उन्हें इन सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।





