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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:18 · नई दिल्ली संस्करण

दलित युवक की हत्या के दोषी दो भाइयों को आजीवन कारावास

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दलित युवक की हत्या के दोषी दो भाइयों को आजीवन कारावास

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के जनपद गाजियाबाद के विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) जितेंद्र मिश्रा की अदालत ने सोमवार को 10 वर्ष बाद दलित युवक की हत्या के आरोपित दो भाई उमेश शर्मा और अंकुर शर्मा को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। दोनों भाईयों पर 11-11 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपितों को ढाई-ढाई माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।वरिष्ठ विशेष लोक अभियोजक अखिलेश कुमार ने बताया कि जटवाड़ा कालोनी निवासी नरेंद्र कुमार की गैस बिल्डिंग क्षेत्र में दुकान थी। कारोबारी संबंधों के चलते उसने उमेश शर्मा से तीन हजार रुपये उधार लिए थे। व्यापार में घाटा होने के कारण वह समय पर रकम वापस नहीं कर सका।31 जुलाई 2016 को दोपहर करीब डेढ़ बजे उमेश का नरेंद्र के पास फोन आया और उसने लोहिया नगर स्थित आटो स्टैंड के पास बीयर की दुकान के निकट पहुंचकर पैसों का हिसाब करने के लिए कहा। नरेंद्र अपने छोटे भाई राजकुमार के साथ मौके पर पहुंचा तो वहां उमेश, उसका भाई अंकुर और एक अन्य व्यक्ति मौजूद थे। इस दौरान पैसों की मांग को लेकर कहासुनी हुई। नरेंद्र ने 10 दिन का समय मांगा, जिससे आरोपित नाराज हो गए।इसके बाद उमेश और अंकुर ने लोहे की राड और बीयर की बोतल से हमला कर दिया। नरेंद्र किसी तरह बच गया, लेकिन उसका भाई राजकुमार गंभीर रूप से घायल हो गया। वह मौके पर ही बेहोश होकर गिर गया। घटना के बाद नरेंद्र घायल भाई को लेकर सिहानी गेट थाने लेकर पहुंचा, जहां उसकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने शुरू में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 यानी हत्या के प्रयास के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।उपचार के दौरान राजकुमार की मौत हो जाने पर मामले में हत्या की धाराएं जोड़ दी गईं। विवेचना के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने मृतक की खून से सनी शर्ट बरामद की। आरोपितों की निशानदेही पर लोहे की राड, टूटी हुई बीयर की बोतल और जूते बरामद किए गए।गवाहों के बयान दर्ज कराने के बाद पुलिस ने उमेश और अंकुर के खिलाफ धारा 302, 201 आइपीसी और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(वी) के तहत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अदालत ने एससी-एसटी एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया। जबकि हत्या करने और सबूत मिटाने का दोषी ठहराते हुए दोनों भाइयों को उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर उम्रकैद की सजा सुनाई।

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