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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:17 · नई दिल्ली संस्करण

कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस में घमासान, सीनियर नेताओं की नाराजगी सामने आई

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस में घमासान, सीनियर नेताओं की नाराजगी सामने आई

बेंगलुरु। कर्नाटक में लंबे समय से प्रतीक्षित राज्य कैबिनेट के विस्तार के बाद सोमवार को सत्ताधारी कांग्रेस में असंतोष फैल गया। कई वरिष्ठ नेताओं ने मंत्री पद न मिलने पर नाराजगी जताई।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और नई दिल्ली में कर्नाटक सरकार के विशेष प्रतिनिधि टीबी जयचंद्र ने नजरअंदाज किए जाने पर निराशा जताई।

उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि सीनियर नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है या ईमानदार नेताओं को। मैं समझ नहीं पा रहा हूं। मैं दुखी हूं।

सात बार विधायक रहे जयचंद्र ने कहा कि उनके समर्थकों और समुदाय के लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें कैबिनेट में जगह मिलेगी और अब वे उनके इस्तीके की मांग कर रहे हैं।

मंत्रियों के चयन पर सवाल उठाते हुए जयचंद्र ने कहा कि लिस्ट देखकर मुझे हैरानी होती है कि हम उन्हें अपना मंत्री कैसे कहें।

उन्होंने कहा कि भविष्य की कार्रवाई तय करने से पहले वह अपने समर्थकों से सलाह लेंगे। उन्होंने आगे कहा कि अगर आप देखें कि पार्टी में क्या हो रहा है, तो कोई अनुशासन नहीं है।

इस विस्तार से कांग्रेस नेताओं में साफ नाराजगी देखी जा रही है।

असंतुष्ट नेताओं और समर्थकों की एक बैठक जयचंद्र के घर पर हुई, जिससे बढ़ती बेचैनी का पता चलता है।

एक और झटके के तौर पर होसादुर्गा के विधायक बीजी गोविंदप्पा ने कर्नाटक खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम से इस्तीफा दे दिया।

पूर्व मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर को कैबिनेट में शामिल न किए जाने के बाद उनके समर्थकों ने बेलागवी में बेंगलुरु-पुणे हाईवे जाम करके विरोध प्रदर्शन किया और अपनी नेता के लिए न्याय की मांग की।

कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड (केएसडीएल) के चेयरमैन और वरिष्ठ विधायक अप्पाजी नाडागौडा ने भी यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि इससे वफादार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ठेस पहुंची है।

उन्होंने कहा कि मुझे दुख है।

कांग्रेस पार्टी में ऐसा नहीं होना चाहिए। यह माहौल पार्टी के लिए अच्छा नहीं है।

नाडागौडा ने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उनके काम को पहचाना था और उन्हें मंत्री बनाया था, लेकिन अफसोस जताया कि अब 'स्वार्थी राजनीति' की वजह से समर्पित नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है।

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