मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:20 · नई दिल्ली संस्करण

अचानक ट्रंप क्यों करते नजर आ रहे हैं भारतीय निर्वाचन की तारीफ, विदेश मंत्रालय ने दिया ये जवाब

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
अचानक ट्रंप क्यों करते नजर आ रहे हैं भारतीय निर्वाचन की तारीफ, विदेश मंत्रालय ने दिया ये जवाब

भारत की चुनावी प्रक्रिया और उसकी मजबूती को लेकर हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर चर्चा छिड़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका में कड़े चुनावी कानूनों और मतदाता पहचान-पत्र की अनिवार्यता की वकालत करते हुए भारतीय चुनाव प्रणाली की प्रशंसा की गई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत की चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता और उसकी मजबूती को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है और यह एक स्थापित तथ्य है।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस पूरे प्रकरण पर पूछे गए सवालों के जवाब में कहा कि इन विशिष्ट बयानों पर उनकी तरफ से कोई अलग टिप्पणी नहीं है, लेकिन भारतीय चुनाव प्रणाली की कार्यकुशलता दुनिया भर में एक मिसाल है। उन्होंने जोर दिया कि भारत में इतने बड़े स्तर पर चुनाव संपन्न कराना और उसमें भी डाक मतपत्रों का उपयोग बहुत सीमित रखना भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे की मजबूती का प्रमाण है। भारत की चुनाव प्रक्रिया में प्रत्येक मतदाता के पास वैध फोटो पहचान दस्तावेज होना अनिवार्य है, जिसे लोकतांत्रिक शुचिता बनाए रखने के लिए एक आवश्यक मानक माना जाता है। भारत की चुनावी प्रणाली की यह पारदर्शिता और अनुशासित प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में अक्सर एक आदर्श के रूप में देखी जाती है।

इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने देश में नागरिकता सत्यापन पर जोर देने के लिए भारतीय चुनाव मॉडल का उदाहरण पेश किया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी एक पोस्ट में भारत के हालिया आम चुनावों का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां 64.6 करोड़ से अधिक लोगों ने मतदान किया। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि बिना वैध फोटो पहचान-पत्र के अमेरिका में चुनाव कैसे आयोजित किए जा सकते हैं। ट्रंप ने दावा किया कि भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनके प्रशासन के साथ हुई बातचीत के दौरान इस विषय पर सवाल उठाए थे।

ट्रंप के इन बयानों का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में प्रस्तावित सेव अमेरिका अधिनियम के लिए समर्थन जुटाना है। इस प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकियों के लिए मतदान हेतु पंजीकरण कराते समय नागरिकता का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। साथ ही, पूरे देश में मतदाता पहचान-पत्र की आवश्यकता को लागू करने और डाक के जरिए मतदान की प्रक्रिया को काफी हद तक सीमित करने का प्रावधान किया गया है। ट्रंप के इस रुख का समर्थन करते हुए अमेरिका में तैनात राजदूत सर्जियो गोर ने भी कहा कि राष्ट्रपति का तर्क बिल्कुल सही है और अमेरिकी संसद को इस अधिनियम को प्राथमिकता के आधार पर पारित करना चाहिए।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें