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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:17 · नई दिल्ली संस्करण

8th Pay Commission: वेतन आयोग के इस नियम से 69 लाख पेंशनर्स की बढ़ी टेंशन, PM मोदी को लिखा ये पत्र

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
8th Pay Commission: वेतन आयोग के इस नियम से 69 लाख पेंशनर्स की बढ़ी टेंशन, PM मोदी को लिखा ये पत्र

देश भर में लगभग 69 लाख पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशनभोगी अभी एक ऐसे सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं जिसका सीधा असर उनकी जेब पर पड़ सकता है। जहां एक तरफ़ मौजूदा कर्मचारियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं ज़ोरों पर हैं, वहीं 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर होने वालों की पेंशन का क्या होगा, इसे लेकर स्थिति अभी भी साफ़ नहीं है। इस उलझन के बीच, रिटायर्ड एम्प्लॉईज़ वेलफ़ेयर एसोसिएशन (REWA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की अपील की है।

रिटायर्ड एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (REWA) ने मांग की है कि 8वें वेतन आयोग के 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (ToR) में तुरंत बदलाव किए जाएं। एसोसिएशन ने कहा है कि इसमें साफ तौर पर यह बताया जाना चाहिए कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर होने वाले पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को भी पेंशन में संशोधन का लाभ मिलेगा। असल में, 8वां वेतन आयोग अभी अलग-अलग राज्यों में कर्मचारियों और यूनियनों के साथ बैठकें कर रहा है। चेन्नई के ITC ग्रैंड चोला होटल में 7 और 8 सितंबर को बैठकें हुईं, जबकि पुडुचेरी में 10 सितंबर को पूरे दिन की बैठकें तय हैं। इन बैठकों में वेतन, भत्ते और पेंशन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।

पेंशनभोगियों के बीच कन्फ्यूजन 8वें वेतन आयोग के नोटिफिकेशन के एक खास हिस्से की वजह से है। REWA के अनुसार, नोटिफिकेशन के पॉइंट 2(e) में डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी (DCRG), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS), यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और पेंशन फ्रेमवर्क की समीक्षा का ज़िक्र है। हालांकि, समस्या यह है कि इन विषयों का ज़िक्र नौकरी कर रहे कर्मचारियों के संदर्भ में किया गया है। 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के नाम वहां साफ तौर पर नहीं लिखे गए हैं। यही बात पेंशनभोगियों की चिंता बढ़ा रही है, जिन्हें डर है कि साफ नियमों के बिना, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ शायद सिर्फ़ मौजूदा कर्मचारियों तक ही सीमित रह जाएगा।

REWA ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में पिछले वेतन आयोगों का भी ज़िक्र किया है। एसोसिएशन के अनुसार, 7वें वेतन आयोग के 'टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस' (कार्य-दायरे) में रिटायरमेंट से जुड़े फ़ायदों और पहले रिटायर हो चुके पेंशनभोगियों की पेंशन में संशोधन का साफ़ तौर पर ज़िक्र था। इसी तरह, 5वें और 6वें वेतन आयोग के 'टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस' में भी 'पेंशनभोगियों' और 'पारिवारिक पेंशनभोगियों' का साफ़ तौर पर ज़िक्र किया गया था। यही वजह है कि इस बार साफ़ तौर पर नाम न होने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। REWA ने बताया कि उसने पहले भी वित्त मंत्री और वित्त सचिव से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण की मांग की थी।

हालाँकि, एसोसिएशन के अनुसार, सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है, जिससे पेंशनभोगियों के बीच उलझन बढ़ रही है। सोशल मीडिया और पेंशनभोगी संगठनों के बीच इस बात पर भी बहस चल रही है कि क्या 8वां वेतन आयोग पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन में संशोधन करेगा।

फिलहाल, सबसे अहम बात यह है कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग का दायरा पूरी तरह साफ नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी पेंशन में बदलाव नहीं होगा, बल्कि नियमों में साफ शब्दों का अभी भी इंतज़ार है। जब तक सरकार लिखित रूप में स्पष्टीकरण नहीं देती, तब तक लाखों पेंशनभोगी यह सवाल पूछते रहेंगे कि 8वें वेतन आयोग के तहत उनकी पेंशन में बदलाव कैसे और किस दायरे में होगा।

इसलिए, REWA ने प्रधानमंत्री के सामने दो मुख्य मांगें रखी हैं: पहली, 8वें वेतन आयोग के 'टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस' (कार्य की शर्तों) में औपचारिक बदलाव करके साफ तौर पर यह बताया जाए कि 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशनभोगी इसमें शामिल हैं; और दूसरी, जब तक 'टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस' में संशोधन नहीं हो जाता, तब तक केंद्र सरकार को पेंशनभोगियों के बीच फैल रही उलझन और तनाव को कम करने के लिए एक अंतरिम प्रेस नोट या आधिकारिक बयान जारी करना चाहिए।

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