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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:57 · नई दिल्ली संस्करण

8वें वेतन आयोग के इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों को 24 घंटे में होगा लाखों का नुकसान! जरूर जानें

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
8वें वेतन आयोग के इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों को 24 घंटे में होगा लाखों का नुकसान! जरूर जानें

सरकारी नौकरी में रिटायरमेंट की तारीख आमतौर पर महज एक प्रशासनिक औपचारिकता मानी जाती है, लेकिन 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के संदर्भ में यही 24 घंटे का अंतर हजारों कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर लंबे समय तक असर डाल सकता है। 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों और 1 जनवरी 2026 को रिटायर होने वालों के बीच नए वेतनमान और पेंशन के लाभ को लेकर बड़ा अंतर बनने की आशंका है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि कटऑफ डेट में बदलाव नहीं किया गया तो 31 दिसंबर को रिटायर हुए कर्मचारी संभावित रूप से 8वें वेतन आयोग के लाभ से बाहर हो सकते हैं।

मौजूदा व्यवस्था में पेंशन रिटायरमेंट के समय निर्धारित वेतन के आधार पर तय होती है। ऐसे में 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन पुराने वेतनमान के आधार पर तय होने की स्थिति बन सकती है, जबकि अगले ही दिन यानी 1 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी को संशोधित वेतनमान का लाभ मिल सकता है। यही अंतर आगे चलकर पेंशन की राशि में भी दिखाई देगा। कर्मचारी संगठनों की चिंता यह है कि एक बार पेंशन पुराने आधार पर तय होने के बाद उसका प्रभाव केवल शुरुआती महीनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लंबे समय तक बना रह सकता है।

देश में करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और लगभग 68 लाख पेंशनभोगी हैं। हर साल करीब 1.5 से 2 लाख केंद्रीय कर्मचारी सेवानिवृत्त होते हैं। ऐसे में 31 दिसंबर 2025 को रिटायर हुए कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग के दायरे में नहीं लाया गया तो बड़ी संख्या में कर्मचारी और उनके परिवार संभावित वित्तीय लाभ से बाहर हो सकते हैं। मध्य प्रदेश में भी करीब एक लाख केंद्रीय कर्मचारी हैं। इनमें रेलवे, आयकर, डाक और दूसरे केंद्रीय विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। इसलिए वेतन आयोग की कटऑफ डेट का मुद्दा प्रदेश के कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

कर्मचारी संगठनों की मांग अब सिर्फ वेतन बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि 8वें वेतन आयोग के विचार क्षेत्र में उन कर्मचारियों को भी शामिल किया जाना चाहिए जो 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त हुए हैं। केंद्रीय कर्मचारी परिसंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष यशवंत पुरोहित के अनुसार, 31 दिसंबर को रिटायर कर्मचारियों को केवल 24 घंटे के अंतर के कारण नए वेतन आयोग के संभावित लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इस विसंगति को दूर करने के लिए वेतन आयोग के स्तर पर स्पष्ट प्रावधान किया जाना जरूरी है।

8वां केंद्रीय वेतन आयोग फिलहाल विभिन्न स्थानों का दौरा कर कर्मचारियों की सेवा शर्तों और अन्य हितधारकों से चर्चा कर रहा है। सितंबर में चंडीगढ़ समेत कई स्थानों के दौरे प्रस्तावित हैं। अक्टूबर में आयोग के बेंगलुरु दौरे के दौरान भी हितधारकों से बातचीत होनी है। मध्य प्रदेश के दौरे की तारीख अभी तय नहीं हुई है। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है और यह अवधि 30 जून 2027 को पूरी होगी।

इस बीच केंद्रीय कर्मचारियों का बड़ा प्रदर्शन 6 सितंबर को हैदराबाद में प्रस्तावित है। इसमें देशभर से कर्मचारी शामिल होंगे। मध्य प्रदेश के केंद्रीय कर्मचारी भी इसमें हिस्सा लेंगे। इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा पेंशन है। कर्मचारी संगठन नई पेंशन व्यवस्था के साथ यूपीएस को लेकर भी अपनी आपत्तियां जता रहे हैं और पुरानी पेंशन योजना यानी ओपीएस बहाल करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में 8वें वेतन आयोग की कटऑफ डेट और पेंशन व्यवस्था दोनों मुद्दे केंद्रीय कर्मचारियों के बीच बड़े सवाल बनते जा रहे हैं। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता उन कर्मचारियों की है, जिनका रिटायरमेंट सिर्फ एक दिन पहले होने के कारण उन्हें संभावित रूप से नए वेतन आयोग के लाभ से बाहर माना जा सकता है।

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