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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:50 · नई दिल्ली संस्करण

पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार जरूरी थी, गद्दारों की पहचान हो गई: कुणाल घोष

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार जरूरी थी, गद्दारों की पहचान हो गई: कुणाल घोष

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने सोमवार को कहा कि हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार जरूरी थी। इस हार से पार्टी के भीतर छिपे गद्दारों की पहचान हो गई।

तृणमूल कांग्रेस विधायक दल के निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 'बागी बहुमत' गुट को स्पष्ट रूप से निशाना बनाते हुए पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि यदि इस बार उनकी पार्टी को इतनी बड़ी हार का सामना नहीं करना पड़ता, तो ऐसे गद्दारों का असली चेहरा कभी सामने नहीं आता।

घोष ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया पर लिखा, "4 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार से मुझे बहुत दुख हुआ। बेलियाघाटा सीट से मेरी जीत की खुशी भी उस हार के सामने फीकी पड़ गई, लेकिन आज मुझे लगता है कि जो हुआ, वह अच्छे के लिए ही हुआ।"

उन्होंने बताया कि अब उन्हें अपनी पार्टी की हार आवश्यक क्यों लगने लगी है।

उनके अनुसार, अगर तृणमूल कांग्रेस जीत जाती, तो ये गद्दार ममता बनर्जी को समर्थकों के रूप में घेर लेते।

उनके मुताबिक, "अगर हम चुनाव जीत जाते, तो कई अवसरवादी लोग दोस्ती का दिखावा करके पार्टी में शामिल रहते। कुछ लोग, जो अब खुद को ईमानदार दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें चोरी और भ्रष्टाचार करने का खुला मौका मिल जाता। पार्टी के कुछ नेताओं का अहंकार भी बढ़ जाता। पार्टी में घुस आए कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग अपने विरोधियों पर और ज्यादा अत्याचार करते तथा पार्टी के भीतर भी किसी को नहीं बख्शते।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर पोस्ट करके कहा, "कुछ गैर-राजनीतिक हस्तियां अनावश्यक रूप से राजनीतिक मंच का हिस्सा बनकर जन प्रतिनिधियों का फायदा उठातीं। पुलिस, नौकरशाहों, बुद्धिजीवियों, उद्योगपतियों और अर्ध-बुद्धिजीवियों का एक वर्ग अपने स्वार्थों को साधने का दिखावा करता।"

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर इन नकाबपोश समूहों की ज्यादतियों के कारण अगर तृणमूल कांग्रेस चुनाव जीत जाती तो समर्पित पार्टी कार्यकर्ताओं, आयोजकों और शुभचिंतकों की अनदेखी की जाती और वे पार्टी के भीतर घुटन महसूस करते।

उनके मुताबिक, “इस चुनाव के नतीजों ने भले ही हमारी पार्टी को सत्ता से बेदखल कर दिया हो, लेकिन इन नतीजों से जमा गंदगी साफ करने में मदद मिली है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में, सच्चे और समर्पित कार्यकर्ता, जो वास्तव में पार्टी से प्रेम करते हैं, तृणमूल कांग्रेस को अपना संघर्ष जारी रखने में मदद करेंगे। भले ही वह अभी बुरे दौर से गुजर रही हो। समय की कसौटी पार्टी को भविष्य के लिए मजबूत बना रही है।”

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