इंदिरा गांधी के खिलाफ खबरें छापने पर प्रिटिंग प्रेस में हुई थी तोड़फोड़

हमीरपुर,। हमीरपुर समेत बुंदेलखंड क्षेत्र में इमरजेंसी के दौरान
इंदिरा गांधी के खिलाफ शहर से लेकर कस्बों तक बड़ा आंदोलन चला था।
स्वतंत्रता पर प्रतिबंधों की बेडिय़ां डालने से आरएसएस के नेताओं ने रेलवे
लाइनें तक उखाड़ दी थी जिससे पुलिस मे स्वयंसेवकों और संघ के नेताओं पर डंडे
भी जमकर बरसाए गए थे। इंदिरा गांधी के खिलाफ उग्र खबरें छापने पर पुलिस ने
स्थानीय प्रिटिंग प्रेस में तोड़ फोड़ भी की थी। इमरजेंसी के पांच दशक गुजर
गए हैं जिसकी आज भी याद कर तमाम लोकतंत्र सेनानी सिंहर उठते हैं।
भारत
में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कुर्सी से हटाने के लिए पूरा
विपक्ष एकजुट होकर सड़क पर आ गया था। सरकार विरोधी आक्रोश को लेकर इंदिरा
गांधी ने 25 जून 1975 की आधी रात के बाद पूरे भारत में इमरजेंसी लगाई थी।
सुबह होते ही देश भर में गैर कांग्रेस दलों के छोटे बड़े नेताओं की धरपकड़
शुरू हो गई थी। यूपी के हमीरपुर जिले में भी इमरजेंसी के दौरान बड़ा हंगामा
कटा था। जगह-जगह इंदिरा के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू हो गई थी।
हमीरपुर जिले के मौदहा कस्बे में बौद्धिक संघ के प्रमुख देवी प्रसाद गुप्ता
भी अपने तमाम साथियों के साथ सरकार विरोधी आन्दोलन को हवा देने में जुट गए
थे। उन पर शिकंजा कसने के लिए खुफिया तंत्र को लगाया गया।
लोकतंत्र
सेनानियों के मुताबिक 3 जुलाई 1975 को संघ पर प्रतिबंध लगने पर देवी
प्रसाद गुप्ता व जिला प्रचारक ओमप्रकाश ने इंदिरा के खिलाफ चोरी छिपे एक
स्थानीय अखबार छापना शुरू किया था। इंदिरा गांधी विरोधी अखबार जैसे ही
क्षेत्र में लोगों के पास पहुंचा तो खुफिया तंत्र ने पुलिस के साथ उनके
घरों पर छापा मारा। पूरी रात प्रिंटिंग प्रेस मशीन के बारे में पूछताछ की
गई। पुलिस ने यातनाएं भी दी लेकिन इनके हौसले कम नहीं हुए। संघ के
कार्यकर्ताओं ने इंदिरा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस ने इन सभी के
खिलाफ रेल पटरियां उखाड़ने और थाने में आग लगाने के आरोप लगाते हुए बड़ी
कार्रवाई की थी। पूरे जिले में इंदिरा गांधी के काले कानून को लेकर विरोध
चलता रहा।
इंदिरा गांधी के खिलाफ खबरें छापने पर हुई प्रिटिंग प्रेस में की गई थी तोड़फोड़
आपातकाल
के दौरान सात माह तक हमीरपुर की जेल में हवा खाने वाले बुजुर्ग लोकतंत्र
सेनानी देवी प्रसाद गुप्ता ने बताया कि आरएसएस के बौद्धिक संघ प्रमुख रहते
काले कानून का विरोध करने पर बड़ी यातनाएं दी गई है। उन्होंने बताया कि जिला
प्रचारक ओमप्रकाश के साथ इमरजेंसी के दौरान चोरी-छिपे एक स्थानीय अखबार
छापना शुरू किया गया था। जिसमें सरकार की कार्रवाई और काले कानून का एक
कालम भी होता था। उन्होंने बताया कि खुफिया तंत्र ने भारी पुलिस बल के साथ
रात में घर में छापा मारा था। रिवाल्वर तानकर प्रिंटिंग प्रेस के बारे में
पता पूछा गया मगर किसी ने भी कोई जानकारी नहीं दी थी। इंदिरा के खिलाफ संघ
के कार्यकर्ताओं के साथ जनता ने भी सड़कों पर नारेबाजी की थी।
कारागार में भी इंदिरा गांधी के खिलाफ लोकतंत्र सेनानियों ने की थी नारेबाजी
देवी
प्रसाद गुप्ता, सरस्वती शरण व सलाउ्ददीन आदि लोकतंत्र सेनानियों ने बताया
कि अक्टूबर 1975 में इमरजेंसी का विरोध करने पर अरेस्ट किया गया था। पुलिस
ने कुरारा थाना फूंकने के प्रयास और रेल पटरियां उखाड़ने के मामले दर्ज किए
थे। गिरफ्तारी के दौरान छेनी और हथौड़ा की बरामदगी भी पुलिस ने दिखाई थी।
उन्होंने बताया कि मदन राजपूत, बृजराज समेत तमाम छात्रों को भी जेल भेजा
गया था। लोकतंत्र सेनानियों ने बताया कि इंदिरा गांधी के खिलाफ नारेबाजी
करने पर हमीरपुर और महोबा के करीब 145 विरोधियों को जेल में बंद किया गया
था। सभी लोग रात भर इंदिरा के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाते रहें। इनके
साथ तमाम बुजुर्ग भी आंदोलनकारियों के समर्थन में साथ रहे थे।
संसदीय क्षेत्र में आम चुनाव में सत्ता विरोधी लहर में कांग्रेस हो गया था सफाया
लोकतंत्र
सेनानियों ने बताया कि आपातकाल 21 माह तक चला था। कांग्रेस के विधायकों और
कुछ मंत्री के इशारे पर जनसंघ समेत अन्य राजनैतिक दलों के कार्यकर्ताओं पर
बड़ी कार्रवाई की गई थी। बताया कि इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में हमीरपुर
संसदीय क्षेत्र में जनता ने कांग्रेस को तगड़ा झटका दिया था। लोकतंत्र
सेनानियों ने बड़ी संख्या में लोगों ने आम चुनाव में कांग्रेस विरोधी लहर
चलाई थी। बताया कि जेल से बाहर आने के बाद इंदिरा विरोधी मुहिम चलाई गई।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1977 के आम चुनाव में कांग्रेस के सांसद स्वामी
ब्रम्हानंद महाराज को सीट गवानी पड़ी थी। बीकेडी के तेज प्रताप सिंह 54
फीसदी मत लेकर सांसद बने थे। लोकतंत्र सेनानियों ने कहा कि इमरजेंसी दौरान
लोगों के मौलिक अधिकार खत्म थे।





