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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:39 · नई दिल्ली संस्करण

स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि नियम 1945 में संशोधन का मसौदा किया जारी, जनता से मांगा सुझाव

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि नियम 1945 में संशोधन का मसौदा किया जारी, जनता से मांगा सुझाव

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 9 मार्च 2026 को एक राजपत्र अधिसूचना (जीएसआर 164(ई) का मसौदा जारी कर औषधि नियम, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत नियम की अनुसूची-एफ के भाग 12सी (पैरा-जी) में 'रक्त उत्पादों के परीक्षण' से संबंधित प्रावधानों में बदलाव का सुझाव दिया गया है, जिस पर मंत्रालय ने आम जनता और विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।

प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य रक्त उत्पादों के परीक्षण के लिए विनियामक आवश्यकताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत फार्माकोपियल मानकों के अनुरूप बनाना और उन उत्पादों पर अतिरिक्त परीक्षण आवश्यकताओं को हटाना है, जिनकी वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के तहत आवश्यकता नहीं है।

भारतीय फार्माकोपिया (आईपी), ब्रिटिश फार्माकोपिया (बीपी), संयुक्त राज्य फार्माकोपिया (यूएसपी) और यूरोपीय फार्माकोपिया (ईपी) में कैलिब्रेशन के लिए मानव प्लाज्मा के आधिकारिक मोनोग्राफ के अनुसार, पूल्ड मानव प्लाज्मा के लिए कठोर परीक्षण प्रोटोकॉल निर्धारित हैं।

प्लाज्मा के पहले समरूप पूल का हेपेटाइटिस बी सतह प्रतिजन, हेपेटाइटिस सी वायरस आरएनए और एचआईवी एंटीबॉडी के लिए अनिवार्य रूप से परीक्षण किया जाता है। प्लाज्मा के अंशों को अलग करने की अनुमति देने से पहले, इन वायरल मार्करों के लिए पूल्ड प्लाज्मा का परीक्षण नकारात्मक होना चाहिए। केवल वे प्लाज्मा पूल जो इन सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, प्लाज्मा-व्युत्पन्न औषधीय उत्पादों के निर्माण के लिए उपयोग किए जाते हैं।

इसके बावजूद, मौजूदा नियामक ढांचे के तहत, पहले से परीक्षित और प्रमाणित प्लाज्मा पूल से निर्मित अंतिम उत्पादों का पुनः परीक्षण किया जाता है।

इसके परिणामस्वरूप, पूल्ड प्लाज्मा चरण और तैयार उत्पाद चरण दोनों में एक ही वायरल मार्कर के लिए परीक्षण की पुनरावृत्ति होती है। इस प्रकार का दोहरा परीक्षण अंतरराष्ट्रीय नियामक प्रथाओं के अनुरूप नहीं है।

प्रस्तावित संशोधन नियामक सामंजस्य, परीक्षण आवश्यकताओं के वैज्ञानिक युक्तिकरण और रोगी सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हुए अनावश्यक अनुपालन बोझ को कम करने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है। हितधारकों को मसौदा अधिसूचना की समीक्षा करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी टिप्पणियां और सुझाव प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

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