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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:16 · नई दिल्ली संस्करण

तीस गांवों में दहशत का पर्याय बना तेंदुआ 22 दिन बाद पिंजरे में हुआ कैद

राष्ट्रीय सागर डेस्क1 मिनट का पठन
तीस गांवों में दहशत का पर्याय बना तेंदुआ 22 दिन बाद पिंजरे में हुआ कैद

सीतापुर। सीतापुर के मिश्रिख वन रेंज में पिछले 22 दिनों से लोगों की रातों की नींद उड़ाने वाला तेंदुआ आखिरकार पिंजरे में कैद हो गया। गोंदलामऊ ब्लॉक के रामपुर खेवटा के जंगल में मंगलवार देर रात दो से तीन बजे के बीच वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में तेंदुआ फंस गया। सुबह छह बजे ग्रामीणों ने पिंजरे में तेंदुआ बंद देख तुरंत वन विभाग को सूचना दी। देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और दहशत के अंत पर राहत की सांस ली।तेंदुए की दहशत की शुरुआत 29 अक्टूबर को दतवल गांव में घरों की छतों पर उसकी चहलकदमी नजर आने से हुई थी। इसके बाद गुजरेहटा, अशरफनगर सेढोली, रघुनाथपुर और रामपुर खेवटा सहित करीब 30 गांवों में उसकी मौजूदगी ने लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया था। खेतों में पगचिह्न मिलने और कई बार ग्रामीणों से आमना-सामना होने से दहशत चरम पर पहुंच गई थी।तेंदुए की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने 6 नवंबर को रामपुर खेवटा के पास पिंजरा लगाया था। पिंजरे में बंधी बकरी को शिकार बनाने आए तेंदुए ने देर रात जैसे ही भीतर कदम रखा, ट्रैप लॉक हो गया।घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए को कब्जे में ले लिया। वन प्रभारी अनिल यादव ने बताया कि सभी प्रक्रियाओं के बाद तेंदुए को उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार दुधवा नेशनल पार्क या किसी चिड़ियाघर में सुरक्षित स्थानांतरित किया जाएगा।22 दिन से दहशत का पर्याय बना तेंदुआ पकड़े जाने के बाद इलाके में खुशी और सुकून दोनों लौट आया है।

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