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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:29 · नई दिल्ली संस्करण

महिलाओं को कमजोर समझना सबसे बड़ी भूल : रानी मुखर्जी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
महिलाओं को कमजोर समझना सबसे बड़ी भूल : रानी मुखर्जी

मुंबई। भारतीय सिनेमा में जब भी मजबूत महिला किरदारों की बात होती है, तो रानी मुखर्जी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। खासतौर पर 'मर्दानी' फ्रेंचाइज़ी ने उन्हें एक ऐसी अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया है, जो सिर्फ पर्दे पर ही नहीं, बल्कि अपनी सोच और बयानों के जरिए भी महिलाओं की ताकत को सामने रखती हैं।

इस बीच आईएएनएस से बात करते हुए रानी मुखर्जी ने 'मर्दानी' होने के मायने पर खुलकर बात की और भारतीय महिलाओं की शक्ति, सहनशक्ति और साहस को बयां किया।

आईएएनएस से बात करते हुए रानी मुखर्जी ने कहा, ''मैं हमेशा सभी से यही कहती हूं कि महिलाएं अपने आप में शक्ति का स्वरूप होती हैं। जब किसी महिला को प्यार और सम्मान मिलता है, तो वह देवी गौरी और देवी पार्वती की तरह शांत, कोमल और करुणामयी होती है। लेकिन अगर कोई महिला को परेशान करता है, उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है, तो वही महिला देवी चंडी और देवी दुर्गा का रूप भी धारण कर सकती है।

महिलाओं को कमजोर समझना सबसे बड़ी भूल है, क्योंकि वे हालात के अनुसार खुद को बदलना और हर चुनौती का सामना करना जानती हैं।''

रानी ने आगे कहा, ''मैं हमेशा भारतीय महिलाओं को सबसे अच्छे और सशक्त रूप में दिखाना चाहती हूं। हर भारतीय महिला के भीतर एक 'सुपरपावर' छिपी होती है, चाहे वह गृहिणी हो, टीचर हो, पत्रकार हो या पुलिस अफसर।

महिलाएं न सिर्फ अपने काम को पूरी ईमानदारी और खूबसूरती से निभाती हैं, बल्कि परिवार और जिम्मेदारियों के बीच भी बेहतरीन संतुलन बनाए रखती हैं।''

रानी मुखर्जी ने कहा, ''वर्दी पहनने वाली या ताकतवर पदों पर बैठी महिलाएं भी आम महिलाओं की तरह रोजमर्रा की जिंदगी जीती हैं, लेकिन उनके भीतर एक खास मानसिक और भावनात्मक ताकत होती है, जो उन्हें हर मुश्किल से लड़ने की हिम्मत देती है।

एक भारतीय महिला होने के नाते मेरे लिए यह बेहद जरूरी है कि मैं दुनिया को दिखा सकूं कि असली 'मर्दानी' कौन होती हैं और असली हीरो किसे कहा जाता है।''

उन्होंने कहा, ''मैं ऐसी सभी महिलाओं से गहराई से प्रेरित हूं जो बिना शोर मचाए, बिना सुर्खियों में आए, हर दिन समाज और अपने परिवार के लिए संघर्ष करती हैं।''

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