सीवान में तनाव: गांधी और चंदू की मूर्ति के अपमान से भड़का गुस्सा, 24 घंटे में दो बड़ी घटनाएं

सीवान में महात्मा गांधी व कामरेड चंद्रशेखर की प्रतिमा का अपमान, सख्त कार्रवाई की मांग
चंदू की प्रतिमा तोड़ी, गांधी की मूर्ति पर थूका ,24 घंटे के भीतर दो नेताओं की प्रतिमा के अपमान से लोगों में आक्रोश
सीवान (बिहार)। जिले में पिछले 24 घंटे के भीतर दो शर्मनाक घटनाओं ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ क्रांतिकारी विचारधारा के प्रतीक स्वर्गीय कामरेड चंद्रशेखर प्रसाद उर्फ चंदू की आदमकद प्रतिमा को असामाजिक तत्वों ने तोड़ डाला, तो दूसरी ओर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ( Mahatma Gandhi ) की मूर्ति पर गुटखा थूककर उसका अपमान किया गया। घटना से आक्रोषित लोगों का कहना है कि दोनों घटनाएं सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश की ओर साफ इशारा करती हैं।
गोलंबर पर दूसरी बार तोड़ी गई चंदू की प्रतिमा
मंगलवार की देर रात सीवान के गोपालगंज मोड़ स्थित गोलंबर (चंद्रशेखर चौक) पर कुछ बदमाशों ने जेएनयू छात्रसंघ( JNU Student Union) के पूर्व अध्यक्ष और शहीद कामरेड चंद्रशेखर उर्फ चंदू की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया। यह दूसरी बार है जब इस मूर्ति के साथ यह हरकत की गई है। घटना से इलाके में हड़कंप मच गया और सामाजिक तनाव फैलाने की कोशिश साफ नजर आई।
गौरतलब है कि चंदू को वामपंथी विचारधारा के लोग एक आदर्श मानते रहे हैं। उनका मानना है कि चंद्रशेखर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। वामपंथी विचारधारा के लोग चंद्रशेखर को शहीद का दर्जा देते हैं, उनका कहना है कि चंदू ने 1997 में सीवान में शहादत दी थी और दबे-कुचले, शोषित वर्गों को अधिकारों के लिए संघर्ष करना सिखाया था। उनकी मूर्ति तोड़ना उनके विचारों और प्रभाव को मिटाने की कोशिश है।
पुलिस खंगाल रही सीसीटीवी फुटेज
सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया। एसपी (SP) पुरन कुमार झा और एसडीपीओ (SDPO) अजय कुमार सिंह रात में ही मौके पर पहुंचे। उन्होंने इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने का आदेश दिया। एसपी (SP) ने स्पष्ट कहा है कि "यह साजिश ज्यादा दिनों तक छिप नहीं पाएगी। दोषियों की पहचान जल्द होगी और उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।" पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
गांधी मैदान में राष्ट्रपिता का अपमान
बताते चलें कि इससे एक दिन पहले सीवान के गांधी मैदान में कुछ अज्ञात लोगों ने महात्मा गांधी ( Mahatma Gandhi ) की मूर्ति पर गुटखा थूक दिया। लोगों का कहना है कि यह घोर अपमान न केवल राष्ट्रपिता बल्कि पूरे देश की संवेदनाओं के साथ खिलवाड़ है। इस घटना ने स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।
साजिश से इनकार, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
सीवान के सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बुद्धिजीवियों ने असामाजिक तत्वों पर गुस्सा जाहिर किया है और कहा है है कि दोनों घटनाएं बताती हैं कि कुछ सामंती सोच वाले तत्व जानबूझकर समाज में अशांति, विभेद और अपमान का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। चंदू की मूर्ति तोड़ना उनके क्रांतिकारी विचारों से डर को दर्शाता है, तो गांधी जी की मूर्ति का अपमान राष्ट्रीय एकता और अहिंसा के प्रतीक पर हमला है।
हालांकि, ऐसे कृत्य महान व्यक्तित्वों की विरासत को कमजोर नहीं कर सकते। चंदू के विचार आज भी दबे-कुचलों को प्रेरित करते हैं और गांधी जी का संदेश अहिंसा व सौहार्द का प्रतीक बना हुआ है। समाज से एकजुट होकर इन साजिशों का मुकाबला करने की अपील की गई है। प्रशासन से मांग की गई है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जाए।





