तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर कसा तंज, कहा – “सूत्र को हम मूत्र समझते हैं”, बिहार वोटर लिस्ट विवाद को बताया राजनीतिक साजिश

तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर कसा तंज, कहा – “सूत्र को हम मूत्र समझते हैं”, बिहार वोटर लिस्ट विवाद को बताया राजनीतिक साजिश
पटना, 13 जुलाई 2025 — बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के तहत विदेशी नागरिकों के नाम पाए जाने के चुनाव आयोग (ECI) के दावों को विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने पूरी तरह खारिज करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बेहद विवादास्पद और व्यंग्यात्मक भाषा का प्रयोग करते हुए कहा, “इस सूत्र को हम मूत्र समझते हैं।” तेजस्वी यादव का यह बयान चुनाव आयोग के उस दावे के जवाब में आया है, जिसमें कहा गया था कि नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के नागरिकों के नाम बिहार की वोटर लिस्ट में शामिल पाए गए हैं।
तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “चुनाव आयोग अब एक संवैधानिक संस्था नहीं रह गई है, बल्कि यह सत्ताधारी दल का एक राजनीतिक सेल बन गई है।” उन्होंने दावा किया कि यह पूरी प्रक्रिया साजिश के तहत चलाई जा रही है, ताकि सामाजिक और जातीय समीकरणों को प्रभावित किया जा सके तथा गरीब, पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक तबकों के वोट काटे जा सकें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि SIR के खिलाफ बिहार की जनता और विपक्षी दल एकजुट हैं और इस “राजनीतिक षड्यंत्र” को वे अदालत और सड़कों पर चुनौती देंगे। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गड़बड़ी का हवाला देकर ECI सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे रहा है और यह लोकतंत्र के खिलाफ एक खतरनाक प्रयास है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा है कि यह विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप हो रही है, जिसमें घर-घर जाकर सत्यापन के दौरान संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान की गई है। आयोग का दावा है कि इन नामों को अंतिम सूची में प्रकाशित नहीं किया जाएगा और मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना लोकतंत्र की प्राथमिक शर्त है।
इस विवाद ने बिहार की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। एक ओर जहां चुनाव आयोग इसे चुनावी शुचिता का प्रयास बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे जनता के मताधिकार पर हमले के रूप में देख रहा है। INDIA गठबंधन के नेताओं ने इसे “जनविरोधी कवायद” बताते हुए बिहार बंद का आह्वान भी किया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है।
यह घटनाक्रम न केवल बिहार बल्कि देश भर के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता, राजनीतिक दखल और नागरिक अधिकारों के टकराव को दर्शाता है। आने वाले विधानसभा चुनावों में इस मुद्दे का असर व्यापक रूप से महसूस किया जा सकता है।





