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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:38 · नई दिल्ली संस्करण

बिजली मांग पूरी करने के लिए तमिलनाडु सरकार एनोर थर्मल विस्तार परियोजना को पुनर्जीवित करेगी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बिजली मांग पूरी करने के लिए तमिलनाडु सरकार एनोर थर्मल विस्तार परियोजना को पुनर्जीवित करेगी

चेन्नई। तमिलनाडु में तेजी से बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने एनोर थर्मल पावर स्टेशन के लंबे समय से अटके विस्तार परियोजना को फिर से शुरू करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। इसके तहत सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर परियोजना को पूरा करने के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं।

तमिलनाडु पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (टीएनपीजीसीएल) ने एनोर में 1×660 मेगावाट की सुपरक्रिटिकल कोयला आधारित थर्मल यूनिट स्थापित करने के लिए टेंडर जारी किया है। यह परियोजना डिजाइन, निर्माण, वित्त, स्वामित्व और संचालन (डीबीएफओओ) आधार पर विकसित की जाएगी।

तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (टीएनपीडीसीएल) की ओर से इस परियोजना के लिए टीएनजीईडीसीओ नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा और लंबे समय के पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) के तहत बिजली की खरीद करेगा।

इस विस्तार परियोजना को पहली बार मार्च 2012 में राज्य सरकार की मंजूरी मिली थी। मई 2014 में एक निजी कंपनी को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था और जनवरी 2018 तक यूनिट के चालू होने की योजना थी।

हालांकि, ठेकेदार की वित्तीय दिक्कतों के चलते निर्माण कार्य ठप पड़ गया और मार्च 2018 तक भौतिक प्रगति 20 प्रतिशत से भी कम रही। इसके बाद अप्रैल 2018 में अनुबंध रद्द कर दिया गया।

परियोजना को बचाने के लिए दिसंबर 2019 में अधूरे कार्य को ‘जैसी स्थिति, वैसी स्थिति’ (एज-इज-वेयर-इज) आधार पर एक अन्य कंपनी को सौंपा गया, लेकिन यह प्रयास भी सफल नहीं हो सका। असंतोषजनक प्रगति के चलते फरवरी 2024 में वह अनुबंध भी समाप्त कर दिया गया, जिससे परियोजना कई वर्षों तक निष्क्रिय रही।

इस पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने भरोसेमंद बेस-लोड क्षमता जोड़ने की तत्काल आवश्यकता बताते हुए पीपीपी मॉडल अपनाने का फैसला किया है।

पुनर्जीवित परियोजना की कुल स्थापित क्षमता 660 मेगावाट होगी, जिसमें से 617 मेगावाट बिजली राज्य उपयोगिता को आपूर्ति की जाएगी।

निविदा शर्तों के अनुसार, चयनित बोलीदाता शेष कार्यों को पूरा करने, परियोजना के लिए वित्तीय व्यवस्था करने, संयंत्र का संचालन एवं रखरखाव करने और दीर्घकालिक समझौते के तहत बिजली आपूर्ति के लिए जिम्मेदार होगा।

नियुक्ति तिथि से 48 महीनों के भीतर बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

परियोजना का आवंटन उस बोलीदाता को किया जाएगा जो सबसे कम टैरिफ का प्रस्ताव देगा। टैरिफ में फिक्स्ड चार्ज और फ्यूल चार्ज शामिल होंगे। फिक्स्ड चार्ज संयंत्र की उपलब्धता से जुड़ा होगा, जबकि फ्यूल चार्ज आवंटित कोयला लिंकिज से वास्तविक उत्पादन पर आधारित रहेगा।

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