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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

बांके बिहारी मंदिर पैनल की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
बांके बिहारी मंदिर पैनल की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को मथुरा के श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवकों की याचिका पर सुनवाई करेगा। इस याचिका में मंदिर के कामकाज की देखरेख के लिए कोर्ट द्वारा बनाई गई उच्च-स्तरीय प्रबंधन समिति के कुछ निर्णयों को चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट की ऑफिशियल वेबसाइट पर पब्लिश कॉज लिस्ट के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई उच्च-स्तरीय प्रबंधन समिति के कुछ फैसलों से मंदिर की पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं पर बुरा असर पड़ा है।

उठाए गए मुद्दों में दर्शन के समय को बढ़ाना और पारंपरिक 'देहरी पूजा' की प्रथा को बंद करना शामिल है।

सुनवाई में मंदिर परिसर और वृंदावन में आसपास के इलाकों के व्यापक विकास पर भी ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।

इससे पहले 26 मई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उच्च-स्तरीय प्रबंधन समिति का दायरा बढ़ाते हुए उसमें 'राज भोग' और 'शयन भोग' गोस्वामी ग्रुप्स से चार चुने हुए प्रतिनिधियों को शामिल किया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मंदिर के प्रशासन में पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं का उचित प्रतिनिधित्व हो।

सुप्रीम कोर्ट ने नए शामिल किए गए सदस्यों को निर्देश दिया था कि वे पारंपरिक प्रथाओं को बनाए रखने और मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए मिलकर उपाय सुझाएं, जिसमें अलग-अलग मौसम के हिसाब से मंदिर के समय के बारे में सुझाव भी शामिल हों।

इसी आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के आसपास के इलाके के समग्र विकास की जरूरत पर भी जोर दिया था और उत्तर प्रदेश सरकार तथा कोर्ट द्वारा बनाई गई समिति से एक व्यापक विकास योजना तैयार करने को कहा था।

प्रस्तावित योजना में बुनियादी ढांचे की जरूरतों जैसे सड़कों को चौड़ा करना, कमर्शियल गतिविधियों को रेगुलेट करना, तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं, पीने के पानी की सुविधा, अस्पताल, आराम करने की जगहें, ट्रांसपोर्ट सर्विस और महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों व दिव्यांग भक्तों के लिए सुविधाओं पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।

राज्य सरकार और प्रबंधन समिति को निर्देश दिया गया था कि वे कोर्ट के विचार के लिए प्रस्तावित विकास उपायों का विवरण देते हुए एक रिपोर्ट सौंपें।

इससे पहले अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने श्री बांके बिहारी मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज की देखरेख के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय प्रबंधन समिति बनाई थी। समिति को भीड़ प्रबंधन, तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं, सुरक्षा उपायों और मंदिर व उसके आसपास के इलाकों के समग्र विकास से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।

समिति का गठन करते समय सुप्रीम कोर्ट ने 'श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025' के उन प्रावधानों पर भी रोक लगा दी, जिनके तहत राज्य सरकार को मंदिर के प्रबंधन के लिए एक अलग ट्रस्ट बनाने का अधिकार दिया गया था। यह रोक तब तक के लिए लगाई गई है, जब तक इलाहाबाद उच्च न्यायालय इसकी वैधता पर फैसला नहीं सुना देता।

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