लखीमपुर खीरी हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट कल करेगा सुनवाई, मामले को लिया स्वत : संज्ञान
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत संज्ञान लिया है। शीर्ष कोर्ट कल मामले की सुनवाई करेगी । इससे पहले इस मामले की शीर्ष अदालत की निगरानी में सीबीआइ जांच कराने के लिए दो वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा था।
नई दिल्ली : लखीमपुर खीरी हिंसा मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। शीर्ष कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ कल मामले की सुनवाई करेगी। इससे पहले इस मामले की शीर्ष अदालत की निगरानी में सीबीआइ जांच कराने के लिए दो वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा था। पत्र में कथित रूप से घटना में शामिल मंत्रियों को दंडित करने की भी मांग की गई है। वकील शिव कुमार त्रिपाठी और सीएस पांडा के पत्र में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसानों की हत्या की गंभीरता को देखते हुए, यह आवश्यक है। इस अदालत को इस इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।
कोई जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं
दो दिन पहले किसानों की एक अन्य याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं होती हैं, तो कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता है। प्रदर्शनकारी दावा तो करते हैं कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण है, लेकिन जब वहां हिंसा होती है तो कोई जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं होता। वहीं केंद्र की तरफ से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि लखीमपुर खीरी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए किसानों के विरोध-प्रदर्शन पर तुरंत रोक लगाने की जरूरत है।
किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद से पीड़ितों के लिए न्याय की मांग हो रही है। यूपी सरकार ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज किया है। केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई है, जिस पर अपने वाहन से भीड़ को कुचलने का आरोप है। हालांकि केंद्रीय मंत्री ने आरोपों से इन्कार किया है।
वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखे पत्र में ने दावा किया कि हाल के दौर में हिंसा देश में राजनीतिक संस्कृति बन गई है। वकीलों ने कहा कि उप्र के इस हिंसाग्रस्त जिले में कानून के शासन की रक्षा करने की आवश्यकता है।
वकीलों के पत्र में कहा गया कि यह घटना उप्र सरकार और संबंधित नौकरशाहों के साथ-साथ गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कानून तोड़ने वाली पुलिस मशीनरी के खिलाफ निर्देश देने की मांग करती है, ताकि देश में हिंसा के चलन को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि उनके आवेदन को जनहित याचिका के रूप में माना जा सकता है, ताकि दोषियों को न्याय के दायरे में लाया जा सके। पत्र में इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने के साथ ही शीर्ष अदालत की निगरानी में उच्च स्तरीय न्यायिक जांच समिति गठित करने की भी मांग की गई है।
लखीमपुर खीरी हिंसा में हुई है 9 लोगों की मौत
यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान रविवार को हुई हिंसा में करीब 9 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें चार किसानों की मौत वाहन से कुचलने से हुई जबकि तीन भाजपा कार्यकर्ताओं और एक पत्रकार को बुरी तरह पीटकर मौत के घाट उतारा गया।





