मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:50 · नई दिल्ली संस्करण

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के गोहत्या प्रतिबंध वाले फैसले पर लगाई रोक

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के गोहत्या प्रतिबंध वाले फैसले पर लगाई रोक

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु में गोहत्या पर पूरी तरह से बैन लगाने के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। 27 मई के हाईकोर्ट ने 1976 के सरकारी आदेश को लागू करके तमिलनाडु में गोहत्या पर राज्यव्यापी प्रतिबंध को तुरंत लागू करने का निर्देश दिया था।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सोमवार को मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि अंतरिम आदेश के जरिए फैसले पर रोक लगाने से पहले उसमें सुधार की जरूरत थी। कोर्ट ने आज इस मामले में नोटिस जारी किया और हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी और अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रशांतो सेन ने तमिलनाडु सरकार का पक्ष रखा।

तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि राज्य में कहीं भी, बकरीद के जश्न के दौरान या किसी अन्य दिन, किसी गाय या बछड़े की हत्या न हो।

हाईकोर्ट का यह विवादित फैसला कोयंबटूर के रहने वाले के. सूर्या की जनहित याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने सार्वजनिक जगहों पर गायों के वध को रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की थी। हालांकि, तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि गाय के वध पर रोक का आदेश देते समय हाईकोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया।

अपनी याचिका में राज्य सरकार ने तर्क दिया कि यह आदेश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के खिलाफ है। इस कानून के अनुसार 10 साल से अधिक उम्र की ऐसी गायों का वध किया जा सकता है, जो काम करने या प्रजनन के लिए उपयुक्त नहीं हैं। इसके अलावा, दूसरे कानून भी पशुओं के वध को नियंत्रित करते हैं, लेकिन कहीं भी इन कानूनों में पूर्ण प्रतिबंध की बात नहीं कही गई है।

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करने और पशु वध को नियंत्रित करने वाले मौजूदा कानूनों के तहत कानूनी स्थिति को बहाल करने का आग्रह किया है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें