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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:36 · नई दिल्ली संस्करण

राज्य सभा में एम्स रायबरेली की बात, सांसद ने कहा डॉक्टर्स की है भारी कमी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
राज्य सभा में एम्स रायबरेली की बात, सांसद ने कहा डॉक्टर्स की है भारी कमी

नई दिल्ली। राज्यसभा में सोमवार को एम्स रायबरेली का विषय उठाया गया। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने यह विषय सदन में उठाया और कहा कि एम्स रायबरेली में सुविधाओं, डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ की भारी कमी है।

उन्होंने सदन में बताया कि एक दशक से अधिक का समय हो चुका है लेकिन एम्स रायबरेली अभी भी पूरी क्षमता के साथ लोगों की सेवा के लिए तैयार नहीं हो पाया है। वहीं राज्यसभा सांसद रजनी अशोकराव पाटिल ने सदन में कहा कि मराठवाड़ा इलाके के बीड जिले में इस साल 250 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं।

राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि यूपीए-2 के शासन काल में 8 अक्टूबर, 2013 में रायबरेली एम्स की आधारशिला रखी गई थी।

लेकिन आज 12 साल से ज्यादा बीत जाने के बाद भी ये अस्पताल अपनी पूरी क्षमता के साथ लोगों की सेवा के लिए तैयार नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि पहले इस अस्पताल में 960 बेड का प्रारूप था, लेकिन अभी 610 बेड हैं। यहां कुल 200 सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्ट है, जो अभी सिर्फ 37 उपलब्ध हैं। वहीं यहां प्रोफेसर के 33 पद स्वीकृत हैं, जिनमें सिर्फ 7 नियुक्त हैं।

तिवारी ने सदन को बताया कि ये हालात शैक्षणिक संस्थान पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस एम्स रायबरेली के पीछे सोनिया गांधी का हाथ था, इसलिए अब राजनीतिक द्वेष के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हालात ये हैं कि नए बजट में सरकार ने एम्स रायबरेली को कुछ भी नहीं दिया है। सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों को राजनीति से अलग हटकर देखना चाहिए।

वहीं रजनी अशोकराव पाटिल ने महाराष्ट्र स्थित मराठवाड़ा के किसानों का मुद्दा राज्यसभा में उठाया। उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा इलाके के बीड जिले में इस साल 250 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं।

ऐसे ही कई जिलों में हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि सूखा-बाढ़ के चलते किसान परेशान होता है और उसकी कोई सुनवाई नहीं होती। पाटिल ने कहा कि हमारा किसान छोटा कर्ज लेने के बाद उसके ब्याज के चक्र में फंसकर अपनी जान दे देता है, जबकि अमीर लोग लाखों-करोड़ों का कर्ज लेकर विदेश भाग जाते हैं। उनपर कोई एक्शन नहीं होता। उन्होंने कहा कि ऐसे में किसानों के लिए एमएसपी की लीगल गारंटी होना बहुत आवश्यक है, ताकि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूती मिल सके।

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