मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:57 · नई दिल्ली संस्करण

मालदा मेडिकल कॉलेज में नवजात मौतों का सिलसिला, 30 दिन में 83 की मौत

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
मालदा मेडिकल कॉलेज में नवजात मौतों का सिलसिला, 30 दिन में 83 की मौत

मालदा ।

मालदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नवजात बच्चों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है। अगस्त महीने में अब तक यहां 83 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि जुलाई में 87 बच्चों ने दम तोड़ दिया था। लगातार हो रही बच्चों की मौतों ने स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञ चिकित्सकों की चिंता बढ़ा दी है।

मालदा मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत की यह स्थिति केवल इस वर्ष की नहीं है। पिछले कई वर्षों से यहां इसी तरह के आंकड़े सामने आते रहे हैं। वर्ष 2025 के अगस्त महीने में यहां 100 बच्चों की मौत हुई थी, जबकि अगस्त 2024 में 96 बच्चों की जान चली गई थी। मालदा मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मृत्यु दर को देखकर विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। बताया जा रहा है कि राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की तुलना में मालदा मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले और भर्ती होने वाले मरीजों का दबाव काफी अधिक है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शनिवार को विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक टीम ने मालदा मेडिकल कॉलेज का दौरा किया। टीम बच्चों की मौत के कारणों, अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था और उपलब्ध बुनियादी ढांचे की विस्तृत समीक्षा की। इस टीम में स्वास्थ्य भवन के अधिकारी, मुर्शिदाबाद के विशेषज्ञ चिकित्सक तथा एसएसकेएम अस्पताल के विशेषज्ञ शामिल हैं।

मालदा मेडिकल कॉलेज में बच्चों के भर्ती होने की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। कई बार एक महीने में साढ़े छह हजार से अधिक बच्चों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है। विशेषज्ञों का प्राथमिक अनुमान है कि मालदा मेडिकल कॉलेज पर मरीजों का दबाव राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों की तुलना में कहीं अधिक है।

बिहार, झारखंड, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा सहित विभिन्न जिलों और राज्यों से गंभीर मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। कई अवसरों पर बांग्लादेश से भी मरीज इलाज कराने मालदा मेडिकल कॉलेज आते हैं। भारी मरीजों के दबाव और उसके अनुपात में सीमित बुनियादी ढांचे को बच्चों की अधिक मौत के प्रमुख कारणों में से एक माना जा रहा है।

मालदा मेडिकल कॉलेज के एमएसवीपी प्रसेनजीत बर ने बच्चों की मौत के संबंध में कहा कि अधिकांश बच्चों को गंभीर अवस्था में दूसरे अस्पतालों से रेफर कर यहां लाया जाता है। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों और जिलों से भी कई गंभीर मरीज रेफर होकर आते हैं। अस्पताल की ओर से हर संभव प्रयास किया जाता है, लेकिन अत्यंत गंभीर स्थिति में पहुंचने वाले सभी बच्चों को बचाना हमेशा संभव नहीं हो पाता।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मालदा मेडिकल कॉलेज पर मरीजों का अत्यधिक दबाव है और अस्पताल में कर्मचारियों की संख्या भी जरूरत के मुकाबले कुछ कम है। शनिवार को पहुंचने वाली विशेषज्ञ टीम की जांच के बाद बच्चों की लगातार हो रही मौतों के पीछे के वास्तविक कारणों और आवश्यक सुधारों को लेकर तस्वीर अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद जतायी है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें