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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:47 · नई दिल्ली संस्करण

स्काईरूट का 'विक्रम-1' सफल लॉन्च, तय कक्षा में पहुंचकर रचा इतिहास

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
स्काईरूट का 'विक्रम-1' सफल लॉन्च, तय कक्षा में पहुंचकर रचा इतिहास

नई दिल्ली,। भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट 'विक्रम-1' शनिवार को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया। 'विक्रम-1' ने अंतरिक्ष में अपनी तय कक्षा (ऑर्बिट) सफलतापूर्वक हासिल कर ली है। इस ऐतिहासिक कामयाबी के साथ ही भारत, निजी क्षेत्र में ऑर्बिटल लॉन्च (कक्षीय प्रक्षेपण) की क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है।

इस रॉकेट को हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस ने विकसित किया है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने आधिकारिक 'एक्स' से पोस्ट करते हुए बताया, "भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' (टेस्ट फ्लाइट-1) ने अंतरिक्ष में अपनी तय कक्षा (ऑर्बिट) सफलतापूर्वक हासिल कर ली है।

रॉकेट ने अपने अंतिम बर्न (ईंधन दहन चरण) को पूरा करते हुए पेलोड्स को पृथ्वी से लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित कर दिया। इस ऐतिहासिक कामयाबी के साथ ही भारत, निजी क्षेत्र में ऑर्बिटल लॉन्च (कक्षीय प्रक्षेपण) की क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है।"

विक्रम-1 में तीन सॉलिड-फ्यूल चरण और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगाया गया है।

मिशन का उद्देश्य 350 किलोग्राम तक के पेलोड को 60 डिग्री के झुकाव वाली 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में स्थापित करना है।

स्काईरूट ने एक्स पर पोस्ट किया, "लिफ्ट-ऑफ! विक्रम-1 श्रीहरिकोटा के पैड से उड़ान भर चुका है।

भारत का पहला प्राइवेट तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट उड़ान भर रहा है। इतिहास रचा जा रहा है।"

एक अन्य पोस्ट में स्काईरूट ने कहा, ""सुरक्षित रूप से टॉवर से अलग होना। टी+10 सेकंड पर, विक्रम-1 टेस्ट फ़्लाइट-1 लॉन्च टॉवर से अलग हो गया है।"

स्काईरूट ने जानकारी दी, "स्टेज 1 अलग हो गया।

कलाम-1200, जो विक्रम-1 टेस्ट फ़्लाइट-1 का सॉलिड पहला स्टेज है, ने रॉकेट को वायुमंडल के सबसे घने हिस्से से बाहर निकाला और आसानी से अलग हो गया। पेलोड फेयरिंग अलग हो गई। विक्रम-1 टेस्ट फ़्लाइट-1 ने उस सुरक्षा कवच को हटा दिया है जिसने वायुमंडल से गुज़रते समय इसके पेलोड को सुरक्षित रखा था।

सैटेलाइट पहली बार अंतरिक्ष में पहुंचते हैं।"

स्काईरूट एक्स पोस्ट में बताया, "स्टेज 2 अलग हो गया। कलाम-250 ने अपना बर्न पूरा कर लिया है और अलग हो गया है, जिससे ऑर्बिट की ओर अगले पुश का रास्ता साफ हो गया है। स्टेज 3 चालू हो गया है।

कलाम-100, जो सबसे छोटा और सबसे ऊँचाई तक जाने वाला सॉलिड स्टेज है, विक्रम-1 टेस्ट फ़्लाइट-1 को ऑर्बिट की ओर अगला बड़ा पुश देने के लिए चालू हो गया है।"

स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित विक्रम-1, 350 किलोग्राम तक के पेलोड को लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में पहुंचाने में सक्षम है।

पूरी तरह से कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर, सॉलिड-फ्यूल बूस्टर और 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन से बना यह लॉन्च व्हीकल भारत के प्राइवेट स्पेस इंडस्ट्री के लिए एक अहम उपलब्धि है।

अपने पहले मिशन में यह कई कस्टमर पेलोड को 450 किलोमीटर की कक्षा (ऑर्बिट) में स्थापित करेगा।

इनमें स्काईरूट का स्कोप सैटेलाइट, डीक्यूब्ड का टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन पेलोड, ग्रह स्पेस का सोलर्स एस 3 सैटेलाइट और कॉस्मोसर्व स्पेस का 'इमब्रेस' रोबोटिक आर्म शामिल हैं, जिसे ऑर्बिटल मलबे (अंतरिक्ष में मौजूद कचरे) को पकड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इस उड़ान में कुछ खास पेलोड भी ले जाए जाएंगे, जैसे "कॉस्मिक ब्लूम" नाम की फूलों के आकार की कलाकृति और 18-कैरेट सोने का एक माइक्रो-रॉकेट, जिस पर वैज्ञानिक सी.वी. रमन, विक्रम साराभाई और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म मूर्तियां बनी हुई हैं।

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