जीका वायरस के खतरे को देख अलर्ट हुई केंद्र सरकार, केरल भेजी विशेषज्ञों की टीम, जानें मौजूदा हालात
नई दिल्ली : कोरोना संकट के बीच केरल में जीका वायरस (Zika Virus) की दस्तक से केंद्र सरकार अलर्ट हो गई है। समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक जीका वायरस (Zika Virus) के 14 मामलों की पुष्टि के बाद केरल में अलर्ट जारी हो गया है। खतरे की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने हालात पर नजर रखने के लिए विशेषज्ञों की छह सदस्यीय केंद्रीय टीम को केरल भेजा है। यह टीम बीमारी से निपटने में राज्य सरकार की मदद करेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी।
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जीका वायरस के कुछ मामले केरल से सामने आए हैं। स्थिति की निगरानी और राज्य सरकार की मदद करने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों की छह सदस्यीय टीम को केरल भेजने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसमें एम्स के वेक्टर जनित रोग विशेषज्ञ भी शामिल हैं। राज्य सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) ने शुक्रवार को जीका वायरस के 13 और मामलों की पुष्टि की।
जीका के लक्षण डेंगू से मिलते-जुलते हैं। इनमें बुखार, रैशेज यानी शरीर पर चकत्ते पड़ना और जोड़ों का दर्द शामिल है। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा है कि जीका के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की गई है। केरल में जीका वायरस का पहला केस 28 जून को सामने आया था। मच्छर के काटने से होने वाली बीमारी से 24 साल की एक गर्भवती महिला संक्रमित मिली थी। इस संक्रमित महिला की कोई ट्रेवल हिस्ट्री नहीं है लेकिन उनका घर तमिलनाडु सीमा पर है।
जीका वायरस के कारण संक्रमित व्यक्ति सात से आठ दिन तक प्रभावित रहता है। वायरस गर्भवती महिला को ज्यादा प्रभावित करता है। इस संक्रमण की वजह से जन्म लेने वाला बच्चा अविकसित दिमाग के साथ पैदा होता है। ब्राजील में साल 2015 में जीका वायरस बड़े पैमाने पर फैल गया था। उस समय इस वायरस के कारण 1600 से अधिक बच्चे विकृति के साथ पैदा हुए थे। भारत में पहली बार जनवरी 2017 में जीका वायरस का मामला सामने आया था। यह वायरस असुरक्षित शारीरिक संबंध और संक्रमित खून से भी फैल सकता है।





