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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:47 · नई दिल्ली संस्करण

केंद्र सरकार देश में 10 से 19 सितंबर तक चलाएगी ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
केंद्र सरकार देश में 10 से 19 सितंबर तक चलाएगी ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान

नई दिल्ली। केंद्र सरकार 10 से 19 सितंबर तक पूरे देश में तटीय स्वच्छता अभियान ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ चलाएगी। इस अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने वैज्ञानिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार, जनभागीदारी तथा विभागीय सहयोग को जोड़कर इसे जन आंदोलन का स्वरूप दिया जाना चाहिए।केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को विज्ञान मंत्रालयों और विभागों के सचिवों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. उमेश वी वाघमारे, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश एस गोखले और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की सचिव डॉ. एन कलैसेल्वी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।बैठक में ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान की रणनीति और तैयारियों की समीक्षा की गई। यह अभियान देश के समुद्री तटों पर स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जाएगा। इसमें वैज्ञानिक संस्थानों, सरकारी एजेंसियों, स्वयंसेवकों, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक विभागों को अलग-अलग संस्थानों की तरह नहीं बल्कि एकीकृत तंत्र के रूप में कार्य करना चाहिए। नियमित संवाद, ज्ञान साझाकरण और संयुक्त पहल के माध्यम से वैज्ञानिक उपलब्धियों का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचाया जा सकता है।बैठक में विज्ञान मंत्रालयों की संचार रणनीति की भी समीक्षा की गई। मंत्रालयों ने पिछले 12 वर्षों, विशेषकर मौजूदा सरकार के पिछले दो वर्षों के दौरान हासिल वैज्ञानिक उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने के लिए वीडियो, डॉक्यूमेंट्री, डिजिटल अभियान, इन्फोग्राफिक्स और सफलता की कहानियों के जरिए जनसंपर्क बढ़ाने की योजनाओं की जानकारी दी।विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ), राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, राष्ट्रीय अंतःविषय साइबर-फिजिकल सिस्टम मिशन और अन्य प्रमुख कार्यक्रमों से जुड़ी जनजागरूकता रणनीति प्रस्तुत की। वहीं, सीएसआईआर ने बताया कि वह पिछले 12 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों पर आधारित एक व्यापक प्रकाशन तैयार कर रहा है, जिसे इस वर्ष सीएसआईआर स्थापना दिवस पर जारी किया जाएगा।जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने सार्वजनिक स्वास्थ्य, जैव-अर्थव्यवस्था, जीनोमिक्स, कृषि जैव प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप क्षेत्र में अपने योगदान को रेखांकित करने वाली प्रकाशन श्रृंखला और ‘डीबीटी क्वीस्ट’ जनभागीदारी अभियान की जानकारी दी।बैठक में सीएसआईआर, इसरो, डीएसटी, डीबीटी, बार्क और अन्य संस्थानों के बीच चल रहे संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों, नवाचार मंचों तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र से जुड़े सहयोगात्मक कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। साथ ही अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) के अंतर्गत विभिन्न परियोजनाओं और डिजिटल मंचों के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां अनुसंधान उत्कृष्टता, तकनीकी नवाचार, संस्थागत समन्वय और जनभागीदारी को साथ लेकर चलना आवश्यक है। सरकार विज्ञान को अधिक सुलभ, प्रभावशाली और विकासोन्मुख बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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