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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:55 · नई दिल्ली संस्करण

राजस्थान के जलजीवन मिशन घोटाले में संजय बडाया को दिल्ली हवाई अड्डे पर किया गया गिरफ्तार

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
राजस्थान के जलजीवन मिशन घोटाले में संजय बडाया को दिल्ली हवाई अड्डे पर किया गया गिरफ्तार

जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 900 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले के कथित मास्टरमाइंड और प्रमुख बिचौलिये संजय बडाया को दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत में ले लिया है।

अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि उन्हें आगे की जांच के लिए जयपुर लाया जा रहा है। संजय बडाया एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए थाईलैंड गए थे। दिल्ली हवाई अड्डे पर उनके पहुंचते ही आव्रजन ब्यूरो ने तुरंत एसीबी को सूचित किया। इसके बाद, एसीबी की एक टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

10 मई को उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था।

इस मामले में तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, संजय बडाया ने जेजेएम घोटाले में मुख्य बिचौलिए की भूमिका निभाई। उन पर पूर्व जल आपूर्ति मंत्री महेश जोशी और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल के करीबी होने का आरोप है।

दोनों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

एजेंसियों का दावा है कि वह वित्तीय लेनदेन, तबादलों और नियुक्तियों, नए व्यक्तियों की भर्ती और निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को सुविधाजनक बनाने में सक्रिय रूप से शामिल थे। बडाया जयपुर के बानी पार्क इलाके के रहने वाले हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें 16 जुलाई 2024 को गिरफ्तार किया था और बाद में 17 दिसंबर 2024 को सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी थी।

जांचकर्ताओं ने खुलासा किया कि 2022 तक बडाया एक बीमा कंपनी में लगभग 7 लाख रुपये के वार्षिक वेतन पर काम करते थे।

हालांकि, कथित जेजेएम घोटाले के बाद उन्होंने कथित तौर पर थोड़े ही समय में काफी संपत्ति अर्जित कर ली थी।

ईडी की जांच में यह भी पता चला कि उन्होंने एक कंपनी स्थापित की थी जिसमें उनकी पत्नी नैना बडाया भी भागीदार थीं। कंपनी ने कथित तौर पर जयपुर में करोड़ों रुपये का कारोबार किया। जांचकर्ताओं ने जाली दस्तावेजों का उपयोग करके जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की जमीन पर अतिक्रमण करने के कथित प्रयासों का भी खुलासा किया।

इस संबंध में एसीबी ने पूर्व जल आपूर्ति मंत्री महेश जोशी को 7 मई को गिरफ्तार किया था।

अदालत ने उन्हें 11 मई तक एसीबी की हिरासत में भेज दिया था। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें सोमवार को एसीबी अदालत में पेश किया जाना है।

इससे पहले, 9 अप्रैल को तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल को भी गिरफ्तार किया गया था और वे वर्तमान में जेल में हैं।

एसीबी की प्रारंभिक जांच और आरोपपत्र के अनुसार, यदि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप सिद्ध होते हैं, तो महेश जोशी, सुबोध अग्रवाल और अन्य सह आरोपियों को 10 साल तक की कठोर कारावास की सजा हो सकती है।

यह अभियान डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के पर्यवेक्षण में चलाया गया था। एएसपी महावीर प्रसाद शर्मा, एएसपी भूपेंद्र सिंह और एएसपी हिमांशु कुलदीप गिरफ्तारी अभियान में शामिल टीम का हिस्सा थे। बताया जाता है कि यह कार्रवाई डीजी गोविंद गुप्ता और एडीजी स्मिता श्रीवास्तव के निर्देशों पर की गई थी।

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