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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:22 · नई दिल्ली संस्करण

कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा न्याय और समानता के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रतीक है: अन्नपूर्णा देवी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा न्याय और समानता के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रतीक है: अन्नपूर्णा देवी

नई दिल्ली। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने शनिवार को कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा केवल एक वैधानिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि न्याय और समानता के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा (एसएचई-बॉक्स) पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि एसएचई-बॉक्स पोर्टल पर 14.8 लाख से अधिक संस्थान पंजीकृत हैं, 60,000 से अधिक आंतरिक समितियां सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, और पिछले छह वर्षों में महिला श्रम बल की भागीदारी 23 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गई है। इससे पता चलता है कि भारत जवाबदेही और महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में निर्णायक बदलाव देख रहा है।

5 लाख करोड़ रुपए से अधिक के ऐतिहासिक बजट आवंटन का जिक्र करते हुए उन्होंने दोहराया कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के केंद्र में हैं, और एक सच्चा विकसित भारत वह होगा जहां हर महिला बिना किसी डर के काम कर सके और नेतृत्व कर सके।

केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कार्यस्थल सुरक्षा को मौलिक अधिकार बताते हुए इस बात पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि 2023-24 में महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी बढ़कर लगभग 41.7 प्रतिशत हो गई, मुद्रा ऋणों का 70 प्रतिशत महिलाओं को दिया गया, पीएम स्वनिधि लाभार्थियों में 44 प्रतिशत महिलाएं थीं, और 90 लाख स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई थीं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये आंकड़े प्रगति दर्शाते हैं, लेकिन लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक महिला जीवन के हर क्षेत्र में सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस करे।

इन भावनाओं को दोहराते हुए, राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की समानता और न्याय के प्रति संवैधानिक प्रतिबद्धता का अभिन्न अंग है।

उन्होंने कहा कि पीओएसएच अधिनियम और एसएचई-बॉक्स पोर्टल जैसे विधायी और संस्थागत तंत्र सभी क्षेत्रों में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास को मजबूत करते हैं।

इससे पहले, महिला एवं बाल विकास सचिव अनिल मलिक ने एसएचई-बॉक्स पोर्टल के माध्यम से हुई संस्थागत प्रगति के व्यापक दायरे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1.5 लाख से अधिक कार्यस्थलों को इसमें शामिल करने और प्रत्येक जिले में स्थानीय समितियों के सक्रिय होने के साथ, एक राष्ट्रव्यापी सुरक्षा ढांचा स्थापित किया गया है।

साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं की श्रम शक्ति में भागीदारी 42 प्रतिशत है और 80 प्रतिशत से अधिक महिलाएं अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं, इसलिए व्यापक कवरेज और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।

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