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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:56 · नई दिल्ली संस्करण

US स्‍टैंड के साथ आए रूस-चीन-पाक: तालिबान का साथ छोड़ा, कहा- हिंसा से काबुल पर जमाया कब्जा तो नहीं मिलेगी मान्यता

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

अफगानिस्तान में तेजी से बदलते हालात के बीच वहां शांति स्थापित करने के उद्देश्य से कतर की राजधानी दोहा में बुलाई गई बैठक में शामिल दर्जनभर देशों ने तालिबान को चेतावनी दी है कि अगर उसने काबुल पर हिंसा के जरिये कब्जा किया तो उसे कोई भी मान्यता नहीं देगा।

नई दिल्ली : अफगानिस्तान में तेजी से बदलते हालात के बीच वहां शांति स्थापित करने के उद्देश्य से कतर की राजधानी दोहा में बुलाई गई बैठक में शामिल दर्जनभर देशों ने तालिबान को चेतावनी दी है कि अगर उसने काबुल पर ¨हसा के जरिये कब्जा किया तो उसे कोई भी मान्यता नहीं देगा। तीन दिनों की बैठक के बाद गुरुवार आधी रात को एक संयुक्त बयान जारी किया गया जिसमें उक्त बात है। लेकिन शुक्रवार को तालिबान ने जिस तरह से काबुल को चारों तरफ से घेरकर आस-पास के शहरों में पुलिस थानों, विश्वविद्यालयों, रेडियो स्टेशन, बैंकों और सैन्य अड्डों पर आसानी से कब्जा कर लिया उससे साफ है कि शांति वार्ता में शामिल देशों के संयुक्त बयान का अब कोई मतलब नहीं रह गया है।

तालिबान एक महीने में काबुल पर कब्जा कर लेगा

एक दिन पहले तक अनुमान था कि तालिबान एक महीने में काबुल पर कब्जा कर लेगा, लेकिन अब माना जा रहा है कि ऐसा कुछ ही दिनों में हो जाएगा।भारत के कूटनीतिक सूत्रों ने 'दैनिक जागरण' को बताया कि ज्यादातर देश अब काबुल में अशरफ गनी सरकार के पतन का इंतजार कर रहे हैं, साथ ही वे अपने अपने दूतावासों को सुरक्षित करने में भी जुटे हुए हैं। गुरुवार को दोहा में हुई बैठक में अमेरिका, रूस, चीन, जर्मनी, नार्वे, पाकिस्तान, ईरान, तुर्की, इंडोनेशिया, तुर्कमेनिस्तान और ताजिकिस्तान के अलावा भारत का प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुआ। संयुक्त बयान में नौ बिंदु हैं और उनका निचोड़ यही है कि तालिबान को आक्रमण और हिंसा की राह छोड़कर युद्धविराम और शांति की राह पर आगे बढ़ना चाहिए। इसमें तालिबान से अफगानिस्तान के सभी प्रांतों और उनकी राजधानियों पर हमले रोकने की अपील की गई है। तालिबान और अशरफ गनी सरकार से कहा गया है वे ¨हसा की राह छोड़कर अफगानिस्तान की समस्या का राजनीतिक हल निकालने के लिए आगे बढ़ें।

राजनीतिक हल का रोडमैप भी दिया

राजनीतिक हल का एक रोडमैप भी संयुक्त बयान में शामिल किया गया है। इसमें कहा गया है कि मानवाधिकार का पालन किया जाएगा, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा की जाएगी। अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी दूसरे देशों की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं किया जाएगा और सभी प्रकार के अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवाधिकार कानूनों का पालन किया जाएगा।

वार्ता से हुआ हल तो पुनर्निर्माण में करेंगे मदद

संयुक्त बयान में अफगानिस्तान के कई हिस्सों में हिंसा, नागरिकों की हत्या, ढांचागत सुविधाओं को नुकसान पहुंचाने जैसे अपराधों की ¨नदा करते हुए इन पर तत्काल रोक लगाने की अपील की गई है। साथ ही कहा गया है कि अगर काबुल पर सैन्य ताकत से कब्जा किया गया तो उसे कोई भी देश मान्यता नहीं देगा, लेकिन अगर अफगानिस्तान में दोनों पक्षों के बीच विमर्श से एक उचित राजनीतिक समाधान को लेकर सहमति बनती है तो सारे देश अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में मदद करेंगे।

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