रुद्रप्रयागः बांसबाड़ा में मंदाकिनी नदी के तेज बहाव में बहा केदारनाथ हाइवे का हिस्सा
रुद्रप्रयाग। बांसबाड़ा में लगातार केदारनाथ हाइवे बंद हो रहा है। यहां पर हाइवे के निचले हिस्से को उफान पर आई मंदाकिनी नदी अपने साथ बहाकर ले गई है। ऊपर से भी लगातार पहाड़ी खिसक रही है। ऐसे में हाइवे को दोनों ओर से अधिक खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय जनता अब बांसबाड़ा में बाईपास निर्माण की मांग करने लगी है।
नासूर बने बांसबाड़ा में पहाड़ी से भूस्खलन बंद होने का नाम ही नहीं ले रहा है। बांसबाड़ा में लगातार पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिर रहे हैं। मंगलवार को मंदाकिनी नदी भी विकराल रूप में आ गई। जिस कारण नदी हाइवे के एक बड़े हिस्से को अपने साथ बहाकर ले गई। ऐसे में यहां पर हाइवे बेहद संकरा भी हो गया है। जिस कारण दुर्घटना का अधिक खतरा बन गया है। बांसबाड़ा में हाइवे के 400 मीटर क्षेत्र में सफर करना कभी भी खतरनाक साबित हो सकता है। हाइवे खुलने पर लोग आवाजाही तो कर रहे हैं लेकिन कभी भी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। हाइवे बंद होने से केदारघाटी में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी नहीं हो पा रही है जबकि केदारनाथ धाम की यात्रा भी बार-बार प्रभावित हो रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता राजेश नेगी, अमित सजवाण, क्षेपंस दीपक सिंह रावत, गोविंद सिंह बिष्ट, कुंवर सिंह चौधरी आदि का कहना है कि बांसबाड़ा में प्रत्येक वर्ष भूस्खलन होता है। खासकर बरसाती मौसम में दिक्कतें अधिक बढ़ जाती हैं और यात्रा भी प्रभावित होती है। यात्रा पर आने वाले यात्रियों और स्थानीय जनता की दिक्कतों को देखते हुए बांसबाड़ा में बाईपास निर्माण आवश्यक हो गया है। बाईपास का निर्माण ही बांसबाड़ा का उपचार हो सकता है। उन्होंने कहा कि बांसबाड़ा में तीन से चार दिन तक हाइवे बंद हो रहा है। जनता भी घरों में फंस रही है। जनता की सुध लेने वाला भी कोई नहीं है। बांसबाड़ा में हाइवे बंद होने के बाद कुछ लोग मौत को दावत देकर बांसबाड़ा डेंजर जोन को पैदल ही पार कर रहे हैं। नीचे से मंदाकिनी नदी उफान पर बह रही है और ऊपर से भूस्खलन वाली डेंजर पहाड़ी को लोग पैदल ही पार कर रहे हैं। स्थिति यह है कि एक छोटा सा पत्थर भी पहाड़ी से गिरता है तो सीधे मौत के मुंह में समाना है।
इस संबंध में पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने कहा कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वह सरासर अनुचित है। बांसबाड़ा में पुलिस की तैनाती की गई है।





