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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:15 · नई दिल्ली संस्करण

स्मृति ईरानी ने अपने पुराने दिन याद करते हुए CM देवेंद्र फडणवीस के बारें में बोल दी ये बड़ी बात

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
स्मृति ईरानी ने अपने पुराने दिन याद करते हुए CM देवेंद्र फडणवीस के बारें में बोल दी ये बड़ी बात

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में अपनी राजनीतिक यात्रा के बारे में खुलकर बात की। इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी जिक्र किया और उनके साथ पार्टी में अपने शुरुआती अनुभवों को साझा किया। स्मृति ईरानी ने व्यक्त किया कि उन्हें देवेंद्र फडणवीस को देखकर गर्व होता है। उल्लेखनीय है कि साल 2024 में उत्तर प्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव हारने के बाद ईरानी कुछ समय से सक्रिय राजनीति से थोड़ा दूर चल रही थीं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें कभी ऐसा लगा कि राज्यसभा के माध्यम से पार्टी उन्हें वापस ला सकती है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन में पद का अर्थ पहचान नहीं, बल्कि एक अवसर होता है। ईरानी ने अपने राजनीतिक जीवन के 24 वर्षों का अनुभव साझा करते हुए कहा कि बहुत से लोग इस बात को पूरी तरह नहीं समझते कि उनके लिए संगठन में पद का मतलब व्यक्तिगत पहचान बनाना नहीं, बल्कि सेवा करने का एक मौका होता है। उन्होंने याद करते हुए कहा कि वह पहली बार 2003 में भाजपा की युवा मोर्चा में पदाधिकारी बनी थीं। यह महाराष्ट्र की बात है, और उस समय उनके साथ जो उपाध्यक्ष थे, उनका नाम देवेंद्र फडणवीस था।

उन्होंने उस दौर को याद करते हुए बताया कि वे दोनों तब 24-25 साल के युवा थे, जो पार्टी के बड़े नेताओं जैसे प्रमोद महाजन, गोपीनाथ मुंडे और नितिन गडकरी को देखकर प्रेरणा लेते थे। स्मृति ईरानी आज भी जब देवेंद्र फडणवीस से मिलती हैं, तो दोनों अपने पुराने दिनों को याद करके मुस्कुराते हैं। उन्हें कभी जीवन में यह अनुमान भी नहीं था कि वे राजनीतिक यात्रा में इतनी दूर तक पहुंचेंगे। एक छोटा सा उदाहरण देते हुए उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनाव का जिक्र किया, जब उन्होंने चांदनी चौक सीट से चुनाव लड़ा था। उस समय एक समर्पित कार्यकर्ता, जो आज भी संगठन में महत्वपूर्ण पद पर हैं और सांसद भी हैं, प्रवीण खंडेलवाल, की टिकट कट गई थी और वह टिकट उन्हें मिल गई थी। प्रवीण खंडेलवाल उनके डमी कैंडिडेट बने थे, जो नामांकन पत्र भरते समय आवश्यक होता है।

प्रवीण खंडेलवाल, जिन्होंने वर्षों से चांदनी चौक में पार्टी के लिए अथक परिश्रम किया था, उनका मुंह उतरा हुआ था। ईरानी ने बताया कि उन्होंने प्रवीण जी से विनम्रतापूर्वक माफी मांगी और कहा कि उन्हें तो पार्टी ने अचानक टिकट दे दिया था, उस वक्त वेंकैया नायडू पार्टी अध्यक्ष थे और उन्होंने सीधे चुनाव लड़ने का फरमान सुनाया था। ईरानी ने प्रवीण जी को भरोसा दिलाया कि उन्हें भी एक दिन संगठन अवश्य मौका देगा, और आज वे सांसद हैं। आज जब स्मृति ईरानी देवेंद्र फडणवीस को देखती हैं, तो उन्हें सचमुच गर्व महसूस होता है। उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि वे तो अपने घर से पेट्रोल के पैसे मांगकर पार्टी के काम के लिए निकलते थे और अक्सर कहा जाता था कि युवा मोर्चा वाले सारा पैसा घर से ही ले जाते हैं।

यह उनकी राजनीतिक यात्रा की विनम्र शुरुआत का प्रतीक है। ईरानी ने 2024 में अमेठी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल के हाथों हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, 2019 के चुनाव में उन्होंने इसी सीट से कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को हराया था, जो उनकी राजनीतिक करियर की एक बड़ी उपलब्धि थी। उनकी यह बातें संगठन के प्रति निष्ठा और समर्पण की भावना को उजागर करती हैं।

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