महाराष्ट्र में बैन हुआ Old Monk! लोग इस बड़ी वजह से नहीं पी पायेंगे रम, जानें पूरी बात

बॉम्बे हाईकोर्ट ने FSSAI के बिक्री रोक वाले आदेश पर 'ओल्ड मॉन्क' निर्माता कंपनी को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है; अगली सुनवाई सितंबर 2026 में होगी। FSSAI का आरोप है कि उत्पाद में फ्लेवर का इस्तेमाल किए जाने के बावजूद लेबल पर इसे 'फ्लेवर्ड रम' घोषित नहीं किया गया था।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘ओल्ड मॉन्क’ रम बनाने वाली मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर ब्रुअरीज प्राइवेट लिमिटेड को फिलहाल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। कंपनी ने महाराष्ट्र में ‘ओल्ड मॉन्क’ की बिक्री पर रोक लगाने वाले भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के आदेश को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नवरोज सीरवाई ने अदालत के समक्ष उत्पाद के तीन संशोधित लेबल पेश किए। कंपनी ने कहा कि ये लेबल संभावित समाधान के विकल्प के तौर पर पेश किए गए हैं और इससे उसके अन्य कानूनी अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।
कंपनी के मुताबिक, यदि दोनों पक्ष इन बदलावों पर सहमत होते हैं तो वह इन्हें लागू करने के लिए तैयार है। केंद्र सरकार और एफएसएसएआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने संशोधित लेबल पर निर्देश लेने के लिए अदालत से समय मांगा। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को अर्जेंट सप्लीमेंट्री बोर्ड में होगी। कंपनी ने एफएसएसएआई के आदेश पर रोक लगाने और अंतिम फैसला आने तक महाराष्ट्र में ‘ओल्ड मॉन्क’ की बिक्री जारी रखने की अनुमति मांगी थी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा चरण में ऐसा अंतरिम आदेश देना व्यावहारिक रूप से अंतिम राहत देने के समान होगा। अदालत ने यह भी कहा कि दोनों पक्ष पहले ही मामले के अंतिम निपटारे से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत दलीलें रख रहे हैं। विवाद की शुरुआत महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के खोपोली स्थित कंपनी के उत्पादन संयंत्र के निरीक्षण के बाद हुई।
एफएसएसएआई का कहना है कि उत्पाद में बाहर से रम का फ्लेवर इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन लेबल पर इसे स्पष्ट रूप से ‘फ्लेवर्ड रम’ के तौर पर घोषित नहीं किया गया था। इसी आधार पर नियामक ने महाराष्ट्र में इसकी बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया था। अब दोनों पक्षों की दलीलों और संशोधित लेबल पर सुनवाई के बाद मामले में आगे की दिशा तय होगी।





