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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

तमिलनाडु में छात्रों को राहत, राजनीतिक प्रदर्शनों पर रोक वाला सर्कुलर वापस

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
तमिलनाडु में छात्रों को राहत, राजनीतिक प्रदर्शनों पर रोक वाला सर्कुलर वापस

चेन्नई। तमिलनाडु के कॉलेजिएट शिक्षा निदेशालय ने सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों को छात्रों को वामपंथी दलों और करप्पनपूची जनता पार्टी द्वारा आयोजित प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने संबंधी विवादित सर्कुलर वापस ले लिया है।

इस निर्देश को लेकर राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और सोशल मीडिया यूजर्स ने कड़ी आपत्ति जताई थी। आलोचकों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने से छात्रों को रोकना उनके लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

वामपंथी संगठनों से जुड़े छात्र अक्सर शिक्षा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ व्यापक सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर होने वाले प्रदर्शनों में हिस्सा लेते हैं।

हाल ही में वामपंथी दलों ने चेन्नई में एक प्रदर्शन आयोजित किया था। यह प्रदर्शन नई दिल्ली में करप्पनपूची जनता पार्टी द्वारा नीट (राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा) के प्रश्नपत्रों में कथित अनियमितताओं और लीक के खिलाफ किए जा रहे आंदोलन के समर्थन में आयोजित किया गया था। चेन्नई के प्रदर्शन में कई छात्र संगठनों ने भी हिस्सा लिया था।

इसी पृष्ठभूमि में कॉलेजिएट शिक्षा निदेशालय ने सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों को सर्कुलर जारी कर छात्रों को वामपंथी दलों और करप्पनपूची जनता पार्टी के प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया था।

सर्कुलर के सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद विवाद और बढ़ गया।

आलोचकों का कहना था कि शिक्षण संस्थान अकादमिक अनुशासन बनाए रखने के लिए कदम उठा सकते हैं, लेकिन छात्रों की शांतिपूर्ण और कानूनी राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी पर व्यापक रोक नहीं लगा सकते।

करप्पनपूची जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास ने भी निर्देश की निंदा करते हुए इसे “असंवैधानिक” बताया।

उन्होंने तमिलागा वेत्रि कझगम सरकार पर अनुचित और मनमाना फैसला लेने का आरोप लगाया।

बढ़ते विवाद के बीच सरकार ने सर्कुलर वापस ले लिया। हालांकि, अधिकारियों की ओर से इसके जारी किए जाने के कारणों पर अब तक विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी या नहीं।

यह घटनाक्रम डिंडीगुल जिले में एक अधिकारी द्वारा कथित तौर पर गुजिलियामपरई तालुक के तहत आने वाले इलाकों में रहने वाले वामपंथी दलों के सदस्यों की जानकारी जुटाने का निर्देश दिए जाने के एक दिन बाद सामने आया है।

निर्देश जारी करने वाले अधिकारी का बाद में तबादला कर दिया गया था। इससे राज्य में कथित तौर पर वैध राजनीतिक गतिविधियों की निगरानी को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

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