मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 10:41 · नई दिल्ली संस्करण

देशभर के वकीलों के लिए राहत, बार काउंसिल ऑफ इंडिया रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में हजारों रुपये नहीं वसूल सकताः सुप्रीम कोर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क1 मिनट का पठन

नई

दिल्ली, वकीलों के लिए एक राहत भरी खबर है। सुप्रीम

कोर्ट ने कहा है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्यों के बार काउंसिल

वकीलों के रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में हजारों रुपये नहीं वसूल सकते । चीफ

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि एडवोकेट एक्ट के

मुताबिक वकीलों से उनके रजिस्ट्रेशन के लिए सामान्य वर्ग के लिए 750 रुपये

और एससी-एसटी वर्ग के लिए 125 रुपये हैं। ऐसे में बार काउंसिल इससे ज्यादा

रजिस्ट्रेशन फीस नहीं वसूल सकते ।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एडवोकेट

एक्ट की धारा 24((1) (एफ) के मुताबिक किसी वकील से जितनी फीस तय है उससे

ज्यादा कोई राशि नहीं वसूली जा सकती है। इसके मुताबिक सामान्य वर्ग के

वकीलों से राज्य बार काउंसिल 600 रुपये और बार काउंसिल ऑफ इंडिया 150 रुपये

वसूल सकती है जबकि एससी-एसटी वर्ग के वकीलों के लिए राज्य बार काउंसिल 100

रुपये और बार काउंसिल ऑफ इंडिया 25 रुपये वसूल सकती है।

सुप्रीम

कोर्ट ने साफ किया कि संसद ने वकीलों के रजिस्ट्रेशन की फीस तय की है और

ऐसे में बार काउंसिल इसका उल्लंघन नहीं कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ

किया कि ये आदेश पहले से रजिस्टर्ड वकीलों के लिए लागू नहीं होगा बल्कि अब

जो भी नए वकील रजिस्ट्रेशन कराएंगे उनके लिए लागू होगा। दरअसल सुप्रीम

कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थी जिसमें राज्यों के बार काउंसिल की ओर

से वकीलों के रजिस्ट्रेशन के लिए कई गुना ज्यादा फीस मांगने को चुनौती दी

गई थी।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें