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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:43 · नई दिल्ली संस्करण

लाल किला धमाका: नौ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 13 जुलाई तक बढ़ी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
लाल किला धमाका: नौ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 13 जुलाई तक बढ़ी

नई दिल्ली। लाल किला कार बम धमाका मामले में विशेष एनआईए अदालत ने नौ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 13 जुलाई तक बढ़ा दी है। अदालत ने यह भी कहा कि 13 जुलाई को धमाके में मारे गए लोगों के शरीर के अंगों पर तैयार की गई फॉरेंसिक (वैज्ञानिक जांच) रिपोर्ट की भी समीक्षा की जाएगी।

अदालत 13 जुलाई को इस मामले में दाखिल चार्जशीट (आरोप पत्र) पर भी विचार कर सकती है। एनआईए ने जांच के बाद फॉरेंसिक रिपोर्ट अदालत में पेश की है।

इससे पहले 27 जून को एनआईए ने इस मामले में तीन और लोगों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें जमीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट और फरार आरोपी मुजफ्फर अहमद (उर्फ फराज/जफर) शामिल हैं। ये तीनों जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं।

अब तक इस मामले में कुल 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। इनमें मुख्य आरोपी उमर उन नबी भी शामिल है, जिसकी कार बम धमाके में ही मौत हो गई थी।

एनआईए के अनुसार, फरार आरोपी मुजफ्फर अहमद पेशे से बच्चों का डॉक्टर (एमबीबीएस, एमडी) है। वह सह-आरोपी अदील अहमद राथर का बड़ा भाई है और आतंकी संगठन का संस्थापक सदस्य बताया गया है। एनआईए का कहना है कि उसने उमर, मुजम्मिल, अदील और मुफ्ती इरफान के साथ मिलकर कार बम धमाके की साजिश रची थी।

जांच में यह भी सामने आया कि जून 2022 में श्रीनगर के ईदगाह इलाके में हुई एक गुप्त बैठक में इस आतंकी संगठन की शुरुआत हुई थी, जिसमें मुजफ्फर भी शामिल था।

एनआईए के मुताबिक, मुजफ्फर ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में बने एक गुप्त ठिकाने पर टीएटीपी आधारित बम बनाने, उनकी जांच करने और उन्हें छिपाकर रखने का काम किया।

अदालत ने मुजफ्फर के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया है और उसे पकड़ने की कोशिश जारी है।

जांच एजेंसी के अनुसार, जमीर अहमद आतंकी संगठन का ओवरग्राउंड वर्कर था। वह आतंकियों तक हथियार, गोला-बारूद और पैसे पहुंचाने का काम करता था। तुफैल अहमद भट पहले लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा था। उसने एक एके-47, एक क्रिंकोव राइफल, एक पिस्तौल, मैगजीन और जिंदा कारतूस लगभग 3 लाख रुपए में मुख्य आरोपी उमर तक पहुंचाए थे।

एनआईए ने इन आरोपियों पर यूएपीए, भारतीय न्याय संहिता, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संबंधित कानूनों की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं।

एनआईए का कहना है कि उसने फॉरेंसिक जांच, मोबाइल लोकेशन, घटनास्थलों की मैपिंग और पैसों के लेनदेन की जांच के जरिए सभी आरोपियों के बीच संबंध और पूरी साजिश के सबूत जुटाए हैं।

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