राजमहल लोकसभा सीट पर लोबिन हेम्ब्रम बिगाड़ रहे इंडी गठबंधन का खेल, भाजपा को मिलेगा लाभ

दुमका,। राजमहल लोकसभा सीट पर 2024 का चुनाव बड़ा ही दिलचस्प होने
वाला है। क्षेत्रीय पार्टी से लेकर केंद्र की पार्टी के नेताओं की नजर
राजमहल सीट पर टिकी हुई है। यहां शुरू से ही झामुमो और भाजपा के बीच कांटे
की टक्कर रही है लेकिन इस बार निर्दलीय प्रत्याशी लोबिन हेम्ब्रम ने पेंच
फंसा दिया है। वे इंडी गठबंधन को मात देने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे
हैं। लिहाजा, इस बार भाजपा के लिए कमल खिलाने का एक सुनहरा है। इस सीट पर
एक जून को मतदान होगा।
लोबिन हेम्ब्रम चुनावी मैदान में यह साफ
कहते आ रहे हैं कि वह इंडी के प्रत्याशी विजय कुमार हांसदा को मात देंगे।
प्रत्येक चुनावी सभा में झामुमो के प्रति आक्रोश भी देखा जा रहा है। लोबिन
के चुनाव प्रचार में उनके पीछे चलने वाला हुजूम किसी पार्टी के भीड़ से कम
नहीं रहा है। ऐसे में कहा जा रहा है कि चुनावी मैदान में लोबिन हेम्ब्रम
इंडी के प्रत्याशी को प्रभावित जरूर करेंगे और इसका डर भी इंडी गठबंधन को
सता रहा है।
चर्चा यह भी है कि लोबिन हेम्ब्रम के चुनावी मैदान में
उतरने से भाजपा को जीत का सुनहरा अवसर मिल गया है। इस बार यदि भाजपा
राजमहल सीट निकाल नहीं पाती है तो शायद ही ऐसा कोई चुनाव होगा जिसमें भाजपा
का कमल खिल पायेगा। जानकार यह बताते हैं कि लोग मोदी को देखकर मतदान
करेंगे। उनके क्षेत्र के प्रत्याशी ताला मरांडी महज एक चेहरा है।
राजमहल
लोकसभा क्षेत्र पूरे साहेबगंज, पाकुड़ जबकि दुमका और गोड्डा जिले के एक-एक
प्रखंड को कवर करता है। यह क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए
आरक्षित है। इस लोकसभा सीट के अन्तर्गत छह विधानसभा सीटें (राजमहल, बोरियो,
बरहेट, लिट्टीपाड़ा, पाकुड़ महेशपुर) आते हैं। इसमें बोरियो, बरहेट,
लिट्टीपाड़ा और महेशपुर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
राजमहल सीट पर कब किसने मारी बाजी
1957 – पाइका मुर्मू – कांग्रेस
1962 – ईश्वर मरांडी – झारखंड पार्टी
1967 – ईश्वर मरांडी – झारखंड पार्टी
1971 – ईश्वर मरांडी – कांग्रेस
1977 – एंथोनी मुर्मू – जनता पार्टी
1980 – सेठ हेम्ब्रम – कांग्रेस
1984 – सेठ हेम्ब्रम – कांग्रेस
1989 – साइमन मरांडी – झारखंड मुक्ति मोर्चा
1991 – साइमन मरांडी – झारखंड मुक्ति मोर्चा
1996 – थॉमस हांसदा – कांग्रेस
1998 – सोम मरांडी – भाजपा
1999 – थॉमस हांसदा – कांग्रेस





