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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:43 · नई दिल्ली संस्करण

राहुल गांधी ने लोकसभा में पूर्व सेना प्रमुख के अप्रकाशित संस्मरण का किया जिक्र, सरकार और विपक्ष के बीच टकराव

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
राहुल गांधी ने लोकसभा में पूर्व सेना प्रमुख के अप्रकाशित संस्मरण का किया जिक्र, सरकार और विपक्ष के बीच टकराव

नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच पूर्व सेना प्रमुख मुकुंद नरवणे की एक 'अप्रकाशित' किताब का हवाला देने को लेकर तीखी बहस हुई।

इस दौरान लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से सदन में व्यवस्था बनाए रखने की कोशिशें पूरी तरह नाकाम रहीं, क्योंकि कांग्रेस पार्टी नरावणे के संस्मरणों का हवाला देने की मांग पर अड़ी रही, जबकि सरकार ने इसका कड़ा विरोध करते हुए इसे 'नाटक' बताया।

यह हंगामा सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष के हमले के बाद शुरू हुआ।

कांग्रेस सांसद ने अपने भाषण की शुरुआत मैगजीन में छपे एक लेख को लेकर केंद्र पर निशाना साधते हुए की, जो पूर्व सेना प्रमुख नरावणे के संस्मरणों पर आधारित था। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत और सीधा पलटवार किया।

राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा कांग्रेस पार्टी की देशभक्ति पर सवाल उठाती है, लेकिन सशस्त्र बलों के एक शीर्ष अधिकारी द्वारा लिखी गई किताब को रोक रही है। जैसे ही उन्होंने संस्मरण से लाइनें पढ़ना शुरू किया, सत्ता पक्ष की बेंचों से जोरदार विरोध शुरू हो गया।

राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी की किताब से उद्धरण देने पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि दावे अस्पष्ट हैं क्योंकि किताब अभी प्रकाशित भी नहीं हुई है। राहुल ने अपना आरोप दोहराते हुए सवाल किया कि सरकार किस बात से डर रही है?

इस दौरान स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों को सलाह दी कि वे किसी भी बिना वेरिफाई किए गए विषय का जिक्र न करें, क्योंकि ऐसा करना संसदीय नियमों का उल्लंघन होगा। जब विपक्ष ने नारे लगाने शुरू किए, तो गृह मंत्री अमित शाह ने इसका जवाब दिया।

उन्होंने स्पीकर से अपील की कि वे विपक्ष के नेता को गलत दावों से सदन को गुमराह करने से रोकें।

राहुल गांधी के दावों पर सदन में हंगामा जारी रहा, जिसमें उन्होंने कहा था कि चीनी टैंक भारतीय सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। विपक्ष इन आरोपों को उठाने पर अड़ा रहा, जबकि केंद्रीय मंत्रियों सहित सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विरोध करना शुरू कर दिया।

भाजपा के कुछ सदस्यों ने संसदीय नियम पुस्तिका का भी हवाला दिया, लेकिन हंगामा और अफरा-तफरी जारी रही।

समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया प्रमुख अखिलेश यादव ने भी राहुल गांधी का साथ दिया और कहा कि चूंकि चीन सीमा एक संवेदनशील मामला है, इसलिए कांग्रेस नेता को इस पर बोलने की इजाज़त दी जानी चाहिए। कांग्रेस सांसदों ने स्पीकर पर भी उंगली उठाई और दावा किया कि सत्ताधारी पार्टी के सांसदों ने नेहरू शासन के बारे में कई बार झूठे दावे किए हैं, लेकिन उन्हें हमेशा छूट दी गई।

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