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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:51 · नई दिल्ली संस्करण

छात्रों को सेमेस्टर ब्रेक के दौरान दी जाएगी ड्रोन की ट्रेनिंग: कुलपति

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
छात्रों को सेमेस्टर ब्रेक के दौरान दी जाएगी ड्रोन की ट्रेनिंग: कुलपति

समस्तीपुर। डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में साफ्ट स्किल और इंटरव्यू स्किल के माध्यम से से करियर के विकास विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए कुलपति डॉ पी एस पांडेय ने कहा कि वे चाहते है कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी पूरी दुनिया में सबसे बेहतर हो‌। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में प्लेसमेंट और विदेश में काम करने के दौरान छात्रों को साफ्ट स्किल और इंटरव्यू स्किल की बहुत आवश्यकता होती है। वे इसके लिए दिल्ली के निजी संस्थानों में लाखों रुपये देकर प्रशिक्षण लेते हैं। इसलिए उन्होंने निर्णय लिया कि सेमेस्टर ब्रेक के दौरान छात्रों को इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाए।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपने छात्रों को सेमेस्टर ब्रेक के दौरान ड्रोन पायलट का भी प्रशिक्षण देगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक अनूठा माडल बनाया जा रहा है जिसमें छात्रों से पायलट ट्रेनिंग के लिए कुल 45000 रूपये फीस के बदले कुछ हजार की न्यूनतम फीस ली जायेगी। सेमेस्टर ब्रेक के दौरान ट्रेनिंग दी जाएगी और प्रशिक्षण के बाद अगले सेमेस्टर में सभी प्रशिक्षित छात्रों को ड्रोन स्प्रेइंग, लैंड सर्वे आदि का ड्रोन से होने वाले कार्य विश्वविद्यालय में ही उपलब्ध करवायेगी । उसके मेहनताना के रूप में न्यूनतम फीस भी उन्हें डिग्री मिलने से पहले वापस कर दी जाएगी ‌ ।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों को समझना चाहिए कि वे दूसरों से अलग और विशिष्ट हैं और विश्वविद्यालय उन्हें अतिविशिष्ट बनाने के लिए लगातार प्रयत्न कर रही है। कुलपति डॉ पांडेय ने कहा कि छात्रों को ड्रोन ट्रेनिंग देने वाला यह देश का पहला विश्वविद्यालय होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षकों, वैज्ञानिकों और छात्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी जल्दी ही प्रशिक्षण आयोजित करवायेगी ताकि विश्वविद्यालय में लोग स्मार्ट और बेहतर तरीके से कार्य कर सकें।

उन्होंने छात्रों से कहा कि संचार कौशल का जीवन में काफी महत्व है और उन्हें अपने विषय के साथ साथ इसमें भी कौशल हासिल करना चाहिए। स्कूल आफ़ एग्री-बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट के निदेशक डॉ रामदत्त ने कहा कि विश्वविद्यालय में पिछले तीन वर्षों में तेजी से प्रगति हुई है और एक नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है।

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