आर.पी. सिंह : “मतदाता सूची से मृत और फर्जी नाम हटाना पारदर्शिता की दिशा में सही कदम, चुनाव आयोग पर सवाल उठाना पराजय का भय दर्शाता है”

आर.पी. सिंह : “मतदाता सूची से मृत और फर्जी नाम हटाना पारदर्शिता की दिशा में सही कदम, चुनाव आयोग पर सवाल उठाना पराजय का भय दर्शाता है”
नई दिल्ली / पटना, 25 जुलाई 2025 — भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने बिहार की मतदाता सूची में सुधार को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों को दोहरे मापदंड करार देते हुए कड़ा हमला बोला है। उन्होंने अपने X account पर लिखा कि जब राज्य सरकार द्वारा 40 लाख नाम राशन कार्ड से और 39 लाख नाम मनरेगा जॉब कार्ड से हटाए गए, तब किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई। लेकिन अब जब चुनाव आयोग मृतकों और डुप्लीकेट मतदाताओं को मतदाता सूची से हटा रहा है, तो हंगामा क्यों मचाया जा रहा है?
आर.पी. सिंह ने ट्वीट कर कहा, “डेटा की सत्यता और पारदर्शिता हर क्षेत्र में लागू होनी चाहिए – चाहे वह कल्याण योजनाओं के लिए हो या मतदान प्रक्रिया के लिए। चुनाव आयोग अपना दायित्व निभा रहा है और उस पर हमला केवल हार के डर को उजागर करता है।”
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बिहार में हाल ही में जारी चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) रिपोर्ट में पाया गया कि राज्य में करीब 18 लाख मृत मतदाता और 7 लाख डुप्लीकेट मतदाता सूची में दर्ज थे। यह आंकड़े न केवल लोकतंत्र की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि पूर्व में वोटर लिस्ट का कितना दुरुपयोग किया गया।
आर.पी. सिंह ने स्पष्ट किया कि भाजपा डेटा शुद्धिकरण और पारदर्शी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि जब सरकारी योजनाओं में अपात्र लाभार्थियों के नाम हटाए जाते हैं, तो विपक्ष चुप रहता है, लेकिन जब मतदाता सूची में सुधार होता है, तब उसे साजिश बताकर चुनाव आयोग को निशाने पर लिया जाता है।
इस पूरे घटनाक्रम को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से जोड़ते हुए आर.पी. सिंह ने कहा कि विपक्ष को अपनी संभावित पराजय का भय सता रहा है, इसीलिए वे चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान की विश्वसनीयता पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया में बाधा डालने वाली मानसिकता को जनता बखूबी समझ रही है।





