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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:16 · नई दिल्ली संस्करण

चार दशक बाद जेल से रिहा हुआ कैदी, 105 की उम्र में मिली आजादी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
चार दशक बाद जेल से रिहा हुआ कैदी, 105 की उम्र में मिली आजादी

मालदा । संपत्ति विवाद को लेकर अपने भाई सुरेश मंडल की हत्या के आरोप में रसिक चंद्र मंडल को 105 साल की उम्र में पूरी आजादी मिल गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उम्र और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए आजीवन कारावास की बाकी सजा माफ कर दी। इस फैसले के बाद परिवार में खुशी का माहौल है।

जानकारी के मुताबिक, रसिक चंद्र मंडल मालदा जिलान्तर्गत मानिकचक थाना के पश्चिम नारायणपुर गांव के निवासी हैं। वर्ष 1988 में संपत्ति विवाद को लेकर अपने भाई सुरेश मंडल की हत्या के आरोप में उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में वर्ष 1994 में उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। उस समय उनकी उम्र 74 वर्ष थी। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद वर्ष 2018 में रसिक चंद्र मंडल ने रिहाई के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत ने भी उनकी सजा रद्द नहीं की, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उनकी शारीरिक स्थिति लगातार खराब होती गई।

वर्ष 2020 में 99 साल की उम्र में उन्होंने समय से पहले रिहाई की मांग करते हुए आवेदन किया। आवेदन में उनकी बढ़ती उम्र और उम्र से जुड़ी विभिन्न शारीरिक समस्याओं का हवाला दिया गया था। मई 2021 में इसी आवेदन के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से इस मामले में जानकारी मांगी। इसके बाद मामला लंबे समय तक चलता रहा। नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत या पैरोल पर रिहा करने का निर्देश दिया। तब से वह जेल से बाहर थे। पिछले शुक्रवार को तीन न्यायाधीशों की पीठ ने मामले का अंतिम निपटारा किया। अदालत ने सोमवार को रसिक चंद्र मंडल की उम्र और शारीरिक स्थिति को देखते हुए उनकी आजीवन कारावास की बाकी सजा खत्म करने का फैसला सुनाया।

करीब चार दशक तक चले इस मामले के बाद आखिरकार रसिक चंद्र मंडल को पूर्ण रिहाई मिल गई। अब अपने जीवन के बाकी दिन वह परिवार के साथ अपनी इच्छा के मुताबिक गुजार सकेंगे।

बताया गया है कि उम्र बढ़ने के कारण उनकी याददाश्त काफी कमजोर हो चुकी है। वह ठीक से बोल भी नहीं पाते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद परिवार में राहत और खुशी का माहौल है।

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