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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 6:36 · नई दिल्ली संस्करण

प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना देश में स्वास्थ्य क्षेत्र को करेगी मजबूत: डॉ. हर्ष वर्धन

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

नई दिल्ली। केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विश्व स्वास्थ्य संगठन दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र के 73वें सत्र में भाग लिया। इस अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय की निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह, विश्व स्वास्थ्य सगंठन के भारत में प्रतिनिधि और डब्ल्यूएचओ स्वास्थ्य आपात कार्यक्रम के क्षेत्रीय आपात निदेशक डॉ. रोडरिको ओफरिन भी उपस्थित रहे। भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए डॉ. हर्ष वर्धन ने कोरोना आपात तैयारियों पर मंत्रियों की गोलमेज बैठक में विचार व्यक्त किए। डॉ. हर्ष वर्धन ने कोरोना के रोगियों के उपचार के लिए आवश्यक पीपीई, वेंटीलेटर और अन्य चिकित्सा मदों का देश में विनिर्माण क्षमता बढ़ाने को उजागर करते हुए कहा कि इससे भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र को फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि भारत ने संक्रमण नियंत्रण और रोकथाम, जांच प्रोटोकॉल, नैदानिक प्रबंधन और जैव चिकित्सा कचरा प्रबंधन तथा कोविड और गैर-कोविड स्वास्थ्य केन्द्रों में अपनाए जाने वाले दिशा-निर्देश विकसित किए। उन्होंने राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए वेब आधारित पोर्टल के विकास का उल्लेख किया, जिनसे जांच, अस्पताल में भर्ती, मरीजों को छुट्टी देने, मृत्यु और रोगियों के लिए चिकित्सा मदों की आवश्यकता के भावी अनुमान की सूचना और जानकारी तेजी से दी जा सकती है। सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को गैर-कोविड आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की सूचना प्रदान करने के लिए निर्देश भी जारी किए गए। डॉ. हर्ष वर्धन ने इन सभी प्रयासों को आत्म निर्भर भारत बनाने के लक्ष्य के साथ जोड़ते हुए कहा कि राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वित दृष्टिकोण अपनाकर साझा संरचना बनाने का काम किया जाएगा। जैव चिकित्सा अनुसंधान और जैव सुरक्षा नीतियों, खाद्य और ड्रग सुरक्षा के विस्तार तथा निजी क्षेत्र के सहयोग समेत बहुक्षेत्रीय आवश्यकताओं पर कार्रवाई के लिए समन्वित कार्यान्वयन प्लेटफॉर्म के विकास के लिए उठाए गए कदमों पर चर्चा की। आत्म निर्भर भारत का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र के निकट सहयोग से पीपीई, एन-95 मास्क तथा अन्य चिकित्सा मदों का देश में विनिर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देने में आने वाली बाधाओं की पहचान करने के प्रयास कर रहा है, ताकि अवरोध दूर किए जा सके।

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