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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:15 · नई दिल्ली संस्करण

श्रमिकों के प्रदर्शन के बाद नोएडा में बढ़ी राजनीति, सपा-लेफ्ट नेताओं की एंट्री पर रोक

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
श्रमिकों के प्रदर्शन के बाद नोएडा में बढ़ी राजनीति, सपा-लेफ्ट नेताओं की एंट्री पर रोक

नोएडा। नोएडा में श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन के बाद अब यह मुद्दा पूरी तरह से राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। शुक्रवार को समाजवादी पार्टी (सपा) और वामपंथी दलों के प्रतिनिधिमंडल के नोएडा पहुंचने के प्रयास के दौरान डीएनडी फ्लाईओवर पर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला।

पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए पहले इन नेताओं को रोक दिया, जिसके चलते मौके पर काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे के नेतृत्व में करीब 10 सदस्यीय सपा प्रतिनिधिमंडल नोएडा के लिए रवाना हुआ था।

इस प्रतिनिधिमंडल में अतुल प्रधान समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। जैसे ही यह दल डीएनडी फ्लाईओवर के जरिए नोएडा में प्रवेश करने लगा, पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

पुलिस का कहना था कि क्षेत्र में पहले से ही तनावपूर्ण हालात हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है।

पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद सपा नेताओं ने इसका विरोध करते हुए मौके पर ही धरना शुरू कर दिया और जमकर नारेबाजी की। इस दौरान डीएनडी पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। करीब आधे घंटे तक चले इस गतिरोध के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और सपा नेताओं से बातचीत की।

सूत्रों के मुताबिक, नोएडा पहुंचने के बाद सपा प्रतिनिधिमंडल को पुलिस अपने साथ पुलिस लाइन ले गई, जहां उनसे आगे की प्रक्रिया के तहत पूछताछ और बातचीत की गई।

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। इस बीच, ग्रेटर नोएडा में सपा के छह से अधिक नेताओं को हाउस अरेस्ट किए जाने की भी खबर है। ये नेता भी प्रदर्शनकारी श्रमिकों से मिलने की तैयारी में थे।

सपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार मजदूरों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है और विपक्ष को मौके पर जाने से रोका जा रहा है। माता प्रसाद पांडे ने आरोप लगाया कि श्रमिकों के साथ अन्याय हुआ है और उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को उनकी पूरी मजदूरी नहीं मिल रही थी, जिसके चलते उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया।

पांडे ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले ही सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हालात बिगड़ने पर प्रशासन ने लाठीचार्ज का सहारा लिया, जो कि निंदनीय है। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीएम का प्रतिनिधिमंडल भी श्रमिकों से मिलने के लिए डीएनडी पहुंचा, लेकिन उन्हें भी पुलिस ने रोक दिया। विरोध में सीपीएम कार्यकर्ता वहीं धरने पर बैठ गए।

बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर दूसरी जगह भेज दिया।

गौरतलब है कि नोएडा में हाल ही में श्रमिकों ने वेतन वृद्धि और अन्य मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया था, जो बाद में उग्र हो गया था। इसके बाद से ही प्रशासन सतर्क है और किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल, स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरे मामले पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है।

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