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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:15 · नई दिल्ली संस्करण

सीजेपी के विरोध मार्च पर छिड़ी सियासी जंग, भाजपा ने किया विरोध, तृणमूल ने दिया साथ

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
सीजेपी के विरोध मार्च पर छिड़ी सियासी जंग, भाजपा ने किया विरोध, तृणमूल ने दिया साथ

कोलकाता। नीट प्रश्नपत्र लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के प्रस्तावित विरोध मार्च को लेकर शुक्रवार को कोलकाता का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस प्रस्तावित आंदोलन पर आपत्ति जताई है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए समर्थन दिया है।

सीजेपी पिछले कई दिनों से दिल्ली में नीट प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के विरोध में आंदोलन कर रही है। संगठन की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। इस आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी समर्थन प्राप्त है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार धरना और अनशन जारी है, जहां कई कलाकारों और विपक्षी दलों के प्रतिनिधि भी आंदोलन के समर्थन में शामिल हो रहे हैं। हालांकि, सरकार और आंदोलनकारियों के बीच हुई वार्ता अब तक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है।

इसी कड़ी में सीजेपी ने शुक्रवार को कोलकाता में भी विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। संगठन से जुड़े होने का दावा करने वाले देदीप्य गांगुली ने बताया कि उन्होंने 24 जुलाई को रैली आयोजित करने की अनुमति के लिए कोलकाता पुलिस को पत्र और कई बार ई-मेल भेजा है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है।

प्रस्तावित मार्च कॉलेज स्ट्रीट से रानी रासमणि एवेन्यू तक निकाला जाना है। आयोजकों के अनुसार, इसमें लगभग 1,500 लोगों के शामिल होने की संभावना है। उनका कहना है कि यदि अनुमति मिलती है तो मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किया जाएगा।

इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के बेलियाघाटा विधायक कुणाल घोष ने आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि कोलकाता पुलिस को रैली की अनुमति देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। जब देश के अन्य हिस्सों, विशेषकर दिल्ली में इस विषय पर प्रदर्शन हो रहे हैं, तो कोलकाता में अनुमति नहीं देने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे रोका नहीं जाना चाहिए।

दूसरी ओर, भाजपा ने प्रस्तावित मार्च पर आपत्ति जताई है। इस बीच, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और किसी भी स्थिति में अशांति फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

फिलहाल, रैली को लेकर कोलकाता पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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