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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:34 · नई दिल्ली संस्करण

बचपन के दोस्त की गुहार पर एक्शन: पीएम मोदी से मुलाकात के 8 दिन बाद सुलझा 15 साल पुराना जमीन विवाद

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
बचपन के दोस्त की गुहार पर एक्शन: पीएम मोदी से मुलाकात के 8 दिन बाद सुलझा 15 साल पुराना जमीन विवाद

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मीरा रोड में रहने वाले 81 वर्षीय असगरअली वोहरा को लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद में राहत मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के आठ दिन बाद भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन से कब्जा छोड़ने और निर्माण अनुमति सरेंडर करने की बात कही है। मेहता से जुड़ी कंपनियों में से एक ने भी मीरा-भायंदर नगर निगम को निर्माण अनुमति वापस करने का पत्र दिया है। दरअसल असगर अली ने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर जमीन विवाद में हस्तक्षेप की मांग की थी।

उन्होंने मामले की सीबीआई जांच की मांग भी रखी थी। मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया। वोहरा का दावा है कि उन्होंने गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में प्रधानमंत्री मोदी के साथ पढ़ाई की थी। असगर अली के मुताबिक, वह करीब 15 वर्षों से जमीन से जुड़े विवाद को लेकर विभिन्न सरकारी विभागों के सामने अपनी शिकायत रखते रहे हैं। उनका आरोप है कि उनकी जानकारी के बिना कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और जमीन को दो कंपनियों के बीच बांट दिया गया। इन कंपनियों के नाम स्वयम बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस हैं। असगर अली ने दोनों कंपनियों को नरेंद्र मेहता से जुड़ा बताया था।

मामले में वर्ष 2015 में एफआईआर भी दर्ज हुई थी। असगर अली के अनुसार, प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद मामले में प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हुईं। मीरा-भायंदर नगर निगम ने दोनों कंपनियों के प्रबंधन को 16 सितंबर को अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया था। इससे पहले मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीकर परदेशी ने मंत्रालय में बैठक बुलाई। इसमें असगर अली वोहरा, नरेंद्र मेहता, नगर निगम आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे शामिल हुए। बैठक के बाद सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने विवादित जमीन से पीछे हटने का फैसला लिया। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी ने नगर निगम के असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ टाउन प्लानिंग को पत्र देकर प्लॉट का कमेंसमेंट सर्टिफिकेट सरेंडर कर दिया।

कंपनी ने बताया कि उसने 13 जून 2019 को रजिस्टर्ड डीड के जरिए प्लॉट खरीदा था और 17 अप्रैल 2026 को निर्माण की अनुमति हासिल की थी। हालांकि, मालिकाना हक को लेकर विवाद के मद्देनजर कंपनी ने परमिट वापस करने का फैसला किया। साथ ही निगम से निर्माण अनुमति रद्द करने और परियोजना के लिए जमा फीस लौटाने का अनुरोध किया। नरेंद्र मेहता ने पुलिस कमिश्नर को भी पत्र भेजकर असगर अली और उनके सहयोगी अजय ढोका के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की बात कही। मेहता ने पत्र में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने का उल्लेख किया। वर्ष 2015 की शिकायत में वोहरा और ढोका पर अतिक्रमण तथा धमकी के आरोप लगाए गए थे। शिकायत वापस लेने से संबंधित पत्र अधिकारियों को सौंपे गए हैं।

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