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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:49 · नई दिल्ली संस्करण

बेलडांगा हिंसा मामले में एनआईए जांच का रास्ता साफ, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से वापस ली याचिका

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बेलडांगा हिंसा मामले में एनआईए जांच का रास्ता साफ, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से वापस ली याचिका

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के बेलडांगा हिंसा मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। प्रदेश में नई सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय से वापस ले लिया है। पूर्व में तृणमूल कांग्रेस सरकार ने एनआईए जांच के आदेश को चुनौती देते हुए मामला दायर किया था। हालांकि, इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) लागू होगा या नहीं, इस पर अंतिम फैसला उच्च न्यायालय करेगा।शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि एनआईए जांच के खिलाफ दायर याचिका वापस ले ली गई है। इसके बाद अदालत ने बेलडांगा हिंसा मामले में एनआईए को 10 दिनों के भीतर एक पूरक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।उच्च न्यायालय ने जांच एजेंसी से कहा है कि वह अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट करे कि उसके पास ऐसे कौन-कौन से नए तथ्य और साक्ष्य आए हैं, जिनके आधार पर इस मामले में यूएपीए की धाराएं लागू करने का औचित्य बनता है। मामले की अगली सुनवाई 30 जून को होगी।सुनवाई के दौरान एनआईए के अधिवक्ता अरुण माइति ने अदालत को बताया कि पिछली सुनवाई में राज्य सरकार को अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया था। इस बीच जांच एजेंसी को कई नए दस्तावेज और महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जो यह संकेत देती हैं कि इस मामले में यूएपीए लागू किया जा सकता है।अदालत ने एनआईए को अंतिम अवसर देते हुए कहा है कि वह ठोस और तर्कसंगत आधार प्रस्तुत करे कि बेलडांगा हिंसा मामले में यूएपीए लगाने की आवश्यकता क्यों है। जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट और तथ्यों के आधार पर उच्च न्यायालय अगली सुनवाई में इस संबंध में निर्णय लेगा।इसी सुनवाई के दौरान मालदा जिले के मोथाबाड़ी में न्यायाधीशों के घेराव की घटना पर भी कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ ने एनआईए को मामले की जांच की प्रगति संबंधी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि मोथाबाड़ी मामले में जिन आरोपितों को निचली अदालत से जमानत मिली है, उन्हें किन आधारों पर राहत प्रदान की गई। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई भी 30 जून को निर्धारित की गई है।

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