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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:56 · नई दिल्ली संस्करण

हत्या के बाद दहशत: घाटी में अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मियों को 10 दिन का अवकाश, 500 से अधिक कर्मचारी जम्मू रवाना

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

श्रीनगर में दो शिक्षकों की हत्या के बाद पीएम पैकेज के तहत 2010-11 में नियुक्त कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में दहशत है। इसी भय से बडगाम, अनंतनाग व पुलवामा से लगभग 500 से अधिक कर्मचारियों ने जम्मू का रुख किया है।

श्रीनगर में दो अल्पसंख्यक शिक्षकों की हत्या के बाद फैले दहशत के मद्देनजर अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े कर्मचारियों को 10 दिन का अवकाश दिया गया है। शुक्रवार को अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षक व कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं गए। इस बीच बड़ी संख्या में पीएम पैकेज के तहत नियुक्त कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने ट्रांजिट कैंप छोड़ दिया है। वे सुरक्षित स्थान पर अथवा जम्मू चले गए हैं। कुपवाड़ा में कश्मीरी पंडित शिक्षकों को ऑनलाइन क्लास लेने और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को माइग्रेंट कैंप से काम करने को कहा गया है।

इस बीच स्वास्थ्य विभाग के दो कर्मचारियों को भी माइग्रेंट कॉलोनी की डिस्पेंसरी में अगले आदेश तक काम करने को कहा गया है। श्रीनगर में दो शिक्षकों की हत्या के बाद पीएम पैकेज के तहत 2010-11 में नियुक्त कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में दहशत है। इसी भय से बडगाम, अनंतनाग व पुलवामा से लगभग 500 से अधिक कर्मचारियों ने जम्मू का रुख किया है। कुछ गैर कश्मीरी पंडित परिवार भी सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। दक्षिणी कश्मीर के काजीगुंड स्थित वेसू विस्थापित कैंप सुबह से ही पुलिस छावनी में तब्दील दिखा।

कश्मीरी पंडितों को कैंप न छोड़ने के लिए समझाते रहे अधिकारी

डीसी डॉ पीयूष सिंगला व अन्य अधिकारी कश्मीरी पंडितों को कैंप न छोड़ने के लिए समझाते रहे। यहां 380 परिवार रहते हैं। इनमें से 20 फीसदी लोग जम्मू चले गए हैं। वेसू कैंप पैकेज इम्प्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष सनी रैना ने बताया कि प्रशासन ने उन्हें पूरी सुरक्षा देने का आश्वासन देते हुए जम्मू न जाने की अपील की है। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू का कहना है कि यह 1990 की याद दिलाता है। कहा कि विश्वास बहाली के कदम के तहत पंडितों को रोजगार देना अल्पसंख्यक विरोधी ताकतों को रास नहीं आ रहा।

दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले के मट्टन में पीएम पैकेज इम्प्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद रैना ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय पर पिछले दिनों हुए हमले के साथ ही कैंप से बाहर रह रहे 250 लोग जम्मू चले गए। श्रीनगर में दो शिक्षकों की हत्या के बाद मुस्लिम समुदाय के साथी कर्मचारियों ने उन्हें कैंप तक सुरक्षित पहुंचाया।

पीएम पैकेज कर्मचारियों ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र

पीएम पैकेज के तहत नियुक्त 4284 कर्मचारियों के संगठन ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि घाटी में ड्यूटी कर रहे कश्मीरी पंडितों में इस माहौल से डर है। यह स्थिति 1990 की याद दिलाती है। कैंप में रहने वाले तो सुरक्षित हैं, लेकिन कैंप के बाहर भी कई लोग रहते हैं जिन्हें नौकरी पर आना होता है। सभी को सुरक्षा दे पाना संभव नहीं है। ऐसे में स्थिति सामान्य होने तक इन कर्मचारियों को ड्यूटी से विरत रहने की अनुमति दी जाए।

पंडितों को छूट देने पर उमर ने उठाया सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सरकार के कश्मीरी पंडितों को नौकरी में दस दिन की छूट देने के फैसले पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से पिक एंड चूज एप्रोच नहीं होनी चाहिए। अगर इन हमलों के बाद कश्मीरी पंडित समुदाय से संबंधित कर्मचारियों को 10 दिन की छुट्टी दी गई है तो ऐसा फैसला सिख समुदाय के लोगों के लिए क्यों नहीं। हमले में कश्मीरी पंडित के साथ ही सिख समुदाय की महिला को भी मारा गया तो फि र यह भेदभाव क्यों। इसलिए मैं सरकार से अपील करता हूं कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए ताकि दोबारा 90 के दशक की तरह पलायन न हो।

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