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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:08 · नई दिल्ली संस्करण

IRCTC Tatkal Ticket Booking: तत्काल खुलते ही साइट हैंग, पैसे कटे पर टिकट नहीं! हाईकोर्ट ने रेलवे को भेजा नोटिस

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
IRCTC Tatkal Ticket Booking: तत्काल खुलते ही साइट हैंग, पैसे कटे पर टिकट नहीं! हाईकोर्ट ने रेलवे को भेजा नोटिस

अगर आपने कभी IRCTC से टिकट बुक किया है तो ये दर्द आपने जरूर झेला होगा - तत्काल की विंडो खुलते ही साइट हैंग, पेमेंट कट गया पर टिकट नहीं आया, और OTP आते-आते सीट गायब। अब इसी आम आदमी की परेशानी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रेलवे को घेरा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने IRCTC और रेल मंत्रालय को नोटिस जारी करके एक हफ्ते में जवाब मांगा है। एडवोकेट उत्तम कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिका में कहा गया है कि IRCTC, RailOne और रेलवे का पूरा पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) आम यात्रियों के साथ नाइंसाफी कर रहा है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने की।

कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील को कहा कि वो IRCTC और तकनीकी एजेंसियों से बात करके अगले बुधवार यानी 7 अक्टूबर तक कोर्ट में पक्ष रखें। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा - "त्योहारों का सीजन खत्म होने के बाद इस याचिका का क्या मतलब रह जाएगा?" याचिका के मुताबिक एडवांस और तत्काल बुकिंग की विंडो खुलते ही IRCTC की साइट लैग करने लगती है। स्क्रीन पर बस गोल-गोल घूमता चक्का दिखता है। खासकर दिवाली-छठ जैसे त्योहारों पर लॉगिन, OTP और ऑथेंटिकेशन ही फेल हो जाता है। बुकिंग सेशन अचानक बंद हो जाता है। ये सबसे बड़ी शिकायत है। कई बार बैंक से 1000-2000 रुपये कट जाते हैं लेकिन टिकट जनरेट नहीं होता। यात्री रिफंड का इंतजार करता रहता है और तब तक दूसरी ट्रेन की सीट भी फुल हो जाती है। याचिका में समयबद्ध रिफंड सिस्टम की मांग की गई है।

आरोप है कि कुछ एजेंट और बिचौलिए अनधिकृत सॉफ्टवेयर, ऑटोमेटेड स्क्रिप्ट और बॉट्स से बल्क में टिकट बुक कर लेते हैं। इससे आम आदमी को कन्फर्म टिकट मिलता ही नहीं है। तत्काल कोटा, RAC और वेटिंग लिस्ट में खाली सीटों के आवंटन में पारदर्शिता नहीं है। खाली सीट कैसे और किसे दी जा रही है, इसका कोई साफ नियम नहीं दिखता। याचिकाकर्ता ने कहा कि बुकिंग लॉग, सर्वर लॉग, पेमेंट गेटवे डेटा, कैंसिलेशन और रिफंड का सारा डेटा रेलवे के पास है, लेकिन उसका ऑडिट नहीं होता। इसलिए स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट होना चाहिए। याचिकाकर्ता ने साफ कहा है कि वो किसी खास सीट की मांग नहीं कर रहे, बल्कि चाहते हैं कि हर आम यात्री को टिकट बुक करने का बराबर और निष्पक्ष मौका मिले। अब सबकी नजर 7 अक्टूबर की सुनवाई पर है, जब IRCTC और रेल मंत्रालय को कोर्ट में बताना होगा कि आखिर हर तत्काल के समय साइट क्यों हैंग होती है और एजेंटों के पास कन्फर्म टिकट कैसे पहुंच जाता है।

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