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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:27 · नई दिल्ली संस्करण

मदरसों में वंदे मातरम की अनिवार्यता पर दिलीप घोष बोले, 'जहां सरकारी पैसा, वहां सरकारी नियम'

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
मदरसों में वंदे मातरम की अनिवार्यता पर दिलीप घोष बोले, 'जहां सरकारी पैसा, वहां सरकारी नियम'

पश्चिम मेदिनीपुर। भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने शुक्रवार को मदरसो में वंदे मातरम् की अनिवार्यता की बात दोहराई। उन्होंने साफ किया कि जहां पर सरकारी पैसे लगेंगे, वहां पर सरकारी नियम भी लागू होंगे।

मंत्री दिलीप घोष ने पत्रकारों से बात करते हुए सभी सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और मदरसों में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' गाने को अनिवार्य करने की बात कही। उन्होंने कहा, "जहां भी सरकारी पैसा लगता है, वहां सरकारी नियम लागू होंगे। सभी स्कूलों और मदरसों में 'वंदे मातरम' गाया जाएगा। राष्ट्रगीत हर जगह गाया जाना चाहिए।

पूरे देश में यही व्यवस्था है।"

दिलीप घोष ने विकास कार्यों को तेज करने और सरकारी खर्च कम करने के लिए नई रणनीति की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अब सरकार एक ही जगह पर बड़ी-बड़ी बैठकें नहीं करेगी, जिसमें अनावश्यक पैसा खर्च होता है। इसके बजाय राज्य को पांच हिस्सों में बांटकर अलग-अलग क्षेत्रों में बैठकें आयोजित की जाएंगी।

मंत्री ने बताया, "सरकार ने फैसला किया है कि हम पश्चिम बंगाल को पांच हिस्सों में बांट रहे हैं। 20 मई को सिलीगुड़ी में पांच जिलों की बैठक हुई। 21 तारीख को दुर्गापुर में पांच जिलों की बैठक हो गई।

इसी तरह आगे भी सिलसिला जारी रहेगा। इन बैठकों में मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्य, स्थानीय विधायक, डीएम, बीडीओ समेत सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित रहेंगे। कोई पब्लिसिटी नहीं, सिर्फ काम की बात होगी।"

बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर दिलीप घोष ने साफ कहा कि उन्हें केवल केस दर्ज करके या खाना खिलाकर रखने का कोई फायदा नहीं है। उन्होंने कहा, "वे कई सालों से यहां रह रहे हैं और सारे फायदे उठा रहे हैं। हमें उन्हें वापस भेजना होगा। इस मामले पर चर्चा चल रही है।

घोष ने आरोप लगाया कि पिछले शासनकाल में पुराने कानूनों का पालन नहीं किया गया और पश्चिम बंगाल को भारत से अलग देश जैसा बनाने की कोशिश की गई।

फुरफुरा शरीफ के पीरजादा तोहा सिद्दीकी द्वारा मुसलमानों से बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करने की अपील पर दिलीप घोष ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया। उन्होंने कहा, "यह बहुत अच्छी बात है कि मुस्लिम समुदाय ने यह अपील की है। गाय की कुर्बानी कोई धार्मिक परंपरा नहीं है और इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।"

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