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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:53 · नई दिल्ली संस्करण

ओली ने कहा-भारत के साथ 'गलतफहमी' दूर, कोरोना से निपटने में मोदी से और मदद की गुहार

राष्ट्रीय सागर डेस्क5 मिनट का पठन

नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने माना कि एक वक्त दोनों पड़ोसी देशों में गलतफहमी हो गई थी, जिसे अब दूर कर लिया गया है। उन्होंने कोरोना महामारी से निपटने में पीएम मोदी से नेपाल के लिए और मदद की अपील की।

नेपाल के संकटग्रस्त प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने कहा कि भारत के साथ 'गलतफहमी' दूर कर ली गई है। पड़ोसियों के प्यार और समस्याएं दोनों साझा करने का जिक्र करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों को भविष्य की तरफ देखते हुए आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए नेपाल को भारत से अपेक्षित मदद नहीं मिली है। ओली ने पीएम मोदी से और अधिक मदद करने की अपील की।

बीबीसी की हिंदी सेवा को दिए एक हालिया साक्षात्कार में ओली ने इस तथ्य को स्वीकार किया कि एक बार दोनों पड़ोसियों में गलतफहमी हो गई थी। हालांकि उन्होंने इस बारे में और विवरण नहीं दिया।

ओली ने टीवी पर प्रसारित राष्ट्र के नाम संबोधन में पिछले महीने कहा था कि भारत के साथ सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को ऐतिहासिक समझौतों, नक्शों और तथ्यात्मक दस्तावेजों के आधार पर कूटनीतिक माध्यमों के जरिये निपटाया जाएगा।

उन्होंने बीबीसी को बताया, 'हां, एक समय गलतफहमी थी, लेकिन अब वो गलतफहमी दूर हो गई हैं। हमें पूर्व की गलतफहमियों में नहीं फंसे रहना चाहिए बल्कि भविष्य को देखते हुए आगे बढ़ना चाहिए। फिलहाल अल्पमत सरकार का नेतृत्व कर रहे, नेपाल के 69 वर्षीय प्रधानमंत्री ने कहा, 'हमें सकारात्मक संबंध बनाने होंगे।'

भारत के साथ नेपाल का विशिष्ट रिश्ता

ओली ने कहा कि नेपाल का भारत के साथ विशिष्ट रिश्ता है जैसा किसी और देश के साथ नहीं है। उन्होंने पूछा, 'पड़ोसी प्यार और समस्याएं दोनों साझा करते हैं। क्या चिली और अर्जेंटीना में लोगों के बीच समस्याएं नहीं हैं?'

नेपाल के नक्शे से हुआ था विवाद

नेपाल द्वारा प्रकाशित किए गए नए राजनीतिक नक्शे में तीन भारतीय क्षेत्रों- लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाल का हिस्सा दिखाए जाने के बाद भारत और नेपाल के संबंधों में काफी तनाव आ गया था। नेपाल द्वारा नक्शा जारी किए जाने के बाद भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे 'एकपक्षीय कार्रवाई' करार दिया था और काठमांडू को चेताया था कि क्षेत्र के 'कृत्रिम विस्तार' के दावों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

भारत ने कहा था कि नेपाल की कार्रवाई ने सीमा से जुड़े मुद्दों को वार्ता के जरिए सुलझाने पर दोनों देशों के बीच बनी सहमति का उल्लंघन किया है। कड़वाहट भरे सीमा विवाद के बाद थमा द्विपक्षीय विनिमय 2020 को उत्तरार्ध में फिर से शुरू हुआ और कई उच्चस्तरीय दौरे हुए, क्योंकि भारत जोर देता रहा है कि वह खुद को हिमालयी राष्ट्र के 'सबसे बड़े मित्र' और विकास साझेदार के तौर पर देखता है।

कोविड-19 से निपटने में विशेष मदद दे भारत

उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत की सीमाएं खुली हैं और भारत को कुछ स्थानों पर नेपाल की मदद के लिये विशेष ध्यान देना चाहिए। ओली ने कहा कि अगर कोविड-19 महामारी भारत में नियंत्रित हो, लेकिन नेपाल में नियंत्रित नहीं हो तो इसका कोई मतलब नहीं है क्योंकि अंतत: इसका प्रसार होगा ही।

उन्होंने पहली बार टीके और अन्य स्वास्थ्य देखभाल सामग्री उपलब्ध कराने के लिये भारत का शुक्रिया अदा किया लेकिन इस बात पर खेद जताया कि नेपाल को उतनी मदद नहीं मिली जितनी उसे भारत से जरूरत थी। उन्होंने कहा कि भारत से काफी उम्मीदें थीं और वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध करना चाहेंगे।

चीन ने 18 तो भारत ने 21 लाख टीके दिए

उन्होंने कहा, 'टीके कोई भी उपलब्ध कराए, वह भारत हो, चीन, ब्रिटेन या अमेरिका, टीके प्राप्त होने चाहिए। इसके राजनीतिकरण की आवश्यकता नहीं है और हम अपने दोनों पड़ोसियों का शुक्रिया अदा करते हैं।' प्रधानमंत्री ओली ने कहा, 'एक तरफ चीन से हमें 18 लाख टीके मिले तो दूसरी तरफ भारत ने 21 लाख टीके दिए हैं। हमें दोनों से मदद मिली है। हमें दोनों से चिकित्सा उपकरण भी प्राप्त हो रहे हैं। इसलिए, दोनों का शुक्रिया।' नेपाल में कोविड-19 से रविवार को 3479 और लोगों के संक्रमित होने के बाद देश में संक्रमण के कुल मामले बढ़कर छह लाख के पार पहुंच गए हैं।

ओली को मिला मधेसी जनता समाजवादी पार्टी का साथ

इस बीच, मुश्किलों में घिरे पीएम ओली ने एक प्रमुख कैबिनेट फेरबदल के बाद मधेसी जनता समाजवादी पार्टी के साथ हाथ मिलाया है। इस कदम को कई विश्लेषकों द्वारा ‘एक तीर से दो निशाने’ लगाने के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि इस कदम से उनका लक्ष्य सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करना और पड़ोसी देश भारत के साथ संबंधों को मजबूत बनाना शामिल हैं।

नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने 22 मई को संसद भंग कर दी थी और 12 तथा 19 नवंबर को मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा की थी। राष्ट्रपति भंडारी ने प्रधानमंत्री ओली और विपक्षी गठबंधन द्वारा नई सरकार बनाने के दावों को खारिज कर दिया था और कहा था कि ये दावे अपर्याप्त हैं। इसके खिलाफ कुछ विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट गए हैं।

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