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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:27 · नई दिल्ली संस्करण

ऋषि कपूर के निधन के बाद थेरेपिस्ट के पास गई थीं नीतू कपूर, बोलीं– 'थेरेपी ने नहीं, बल्कि दोस्तों ने दिया बड़ा सहारा'

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
ऋषि कपूर के निधन के बाद थेरेपिस्ट के पास गई थीं नीतू कपूर, बोलीं– 'थेरेपी ने नहीं, बल्कि दोस्तों ने दिया बड़ा सहारा'

मुंबई। आजकल कई लोग मानसिक परेशानी के समय थेरेपी और काउंसलिंग का सहारा लेते हैं, लेकिन बॉलीवुड की अभिनेत्री नीतू कपूर की सोच इस मामले में थोड़ी अलग है। उन्होंने बताया कि वह व्यक्तिगत रूप से थेरेपी पर ज्यादा भरोसा नहीं करतीं। उनका मानना है कि इंसान को ऐसे दोस्तों और परिवार की जरूरत होती है, जिनसे वह खुलकर बात कर सके और अपना दर्द बांट सके।

नीतू कपूर अभिनेत्री सोहा अली खान के पॉडकास्ट 'ऑल अबाउट हर' में पहुंचीं, जहां उन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर के बारे में बात की। बातचीत के दौरान उन्होंने पति ऋषि कपूर के निधन के बाद के समय को याद किया। उन्होंने कहा, ''वह दौर मेरे लिए बेहद कठिन था और उस समय कई लोगों ने मुझे थेरेपिस्ट से मिलने की सलाह दी थी।

मैंने लोगों की बात मानकर एक थेरेपिस्ट से बातचीत भी की, लेकिन मुझे अंदर से ऐसा महसूस नहीं हुआ कि यह तरीका मेरे लिए सही है।''

नीतू कपूर ने कहा, ''मुझे लगता है कि अच्छे दोस्त किसी भी थेरेपी से ज्यादा जरूरी होते हैं। हर इंसान के पास ऐसे चार-पांच करीबी दोस्त होने चाहिए, जिनसे वह अपने मन की हर बात बिना डर के कह सके। जब इंसान अपने दर्द और परेशानियों को भरोसेमंद लोगों के साथ साझा करता है, तो उसका मन हल्का हो जाता है। कई बार अपने लोगों का साथ ही सबसे बड़ी दवा बन जाता है।

''

उन्होंने आगे कहा, ''ऋषि कपूर के जाने के बाद मैं अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी। उस समय मैं बहुत दुखी और अकेली महसूस करती थी। जब मैं थेरेपिस्ट के पास बैठती थी तो खुद से सवाल करती थी कि आखिर मैं वहां क्या कर रही हूं। जब तक इंसान खुद अंदर से मजबूत बनने का फैसला नहीं करता, तब तक कोई भी उसे पूरी तरह संभाल नहीं सकता। थेरेपी में मुझे मेडिटेट करने, गिनती करने और अलग-अलग तरीके अपनाने की सलाह दी गई, लेकिन मुझे यह सब अपने लिए सही नहीं लगा।''

नीतू कपूर ने कहा, ''हर इंसान का दुख से बाहर आने का तरीका अलग होता है।

कुछ लोगों को थेरेपी से मदद मिलती है और यह अच्छी बात है, लेकिन मेरे लिए दोस्तों, परिवार और काम ने सबसे बड़ा सहारा दिया। काम में खुद को व्यस्त रखने से मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनने में मदद मिली। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने से भी मुझे धीरे-धीरे दुख से बाहर निकलने की ताकत मिली।''

ऋषि कपूर का अप्रैल 2020 में कैंसर के चलते निधन हो गया था।

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