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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:49 · नई दिल्ली संस्करण

बिहार चुनाव में एनडीए को मिला प्रचंड बहुमत 'खरीदा' हुआ : जन सुराज

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बिहार चुनाव में एनडीए को मिला प्रचंड बहुमत 'खरीदा' हुआ : जन सुराज

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिले प्रचंड बहुमत को जन सुराज ने 'खरीदा' हुआ बताया है। जन सुराज का मानना है कि सरकार ने जनता के पैसे से वोट खरीदे।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में इस जनादेश का सम्मान करते हुए मतदाताओं को धन्यवाद दिया। उन्होंने एनडीए की जीत पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं भी दी हैं।

उन्होंने कहा कि हमें और खुशी होती कि एनडीए का प्रचंड बहुमत उनके किए गए कार्य के आधार पर मिलता, लेकिन यह जगजाहिर है कि यह प्रचंड बहुमत खरीदा हुआ है।

उन्होंने कहा कि जन सुराज और बिहार के लोगों का मानना है कि 21 जून के बाद चुनाव तक 40 हजार करोड़ रुपए खर्च कर बहुमत खरीदा गया। जनता के पैसे से जनता के वोट खरीदे गए और बिहार के भविष्य को बेचा गया। यह जो पैसे खर्च किए गए वह शक्ति बिहार की अर्थव्यवस्था में नहीं है।

उन्होंने आरोप यह भी लगाया कि सुना जा रहा है कि विश्व बैंक से जो कर्ज मिला था, उसके पैसे भी महिलाओं को देने में लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को जो पैसा मिला उससे उन्हें लगा कि यह वरदान है।

प्रचंड बहुमत का यही कारण है।

उन्होंने एनडीए से मांग करते हुए कहा कि बिहार में एक साफ-सुथरी सरकार बने जिसमें भ्रष्ट और दागी लोगों को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिले। सरकार बिहार की चिंता करे। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग लगाने के लिए सोचेगी।

जन सुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगे कहा, "जिस दृढ़ता के साथ हम शुरू हुए थे, वह दृढ़ता और संकल्प बिना किसी परिवर्तन के उसी तरह दिखेगा।

हम जिस तरह से सरकार की नाकामियों और भ्रष्टाचारों को उजागर करते रहे हैं, वह सिलसिला अनवरत चलता रहेगा।"

उन्होंने आगे कहा कि महागठबंधन को वैसी सफलता नहीं मिली है। पहले भी उनके पास अधिक लोग थे, लेकिन वे अच्छी तरह विपक्ष की भूमिका नहीं निभा रहे थे। जन सुराज एक मुख्य विपक्ष की भूमिका में नजर आएगा और आगे बढ़ेगा।

प्रशांत किशोर के जदयू के 25 सीटों से अधिक आने पर राजनीति छोड़ देने के बयान पर उन्होंने कहा कि जब यह बयान दिया गया था तब यही स्थिति थी, लेकिन बाद में सरकारी खजाना खोल दिया गया। उसके बाद स्थिति ही बदल गयी। उन्होंने माना कि जितना वोट जन सुराज को मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला।

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