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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:47 · नई दिल्ली संस्करण

एनडीए ने झारखंड आंदोलन के लिए विपक्ष को बताया जिम्मेदार, कहा-छात्रों के साथ हिंसा पर चुप क्यों हैं राहुल

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
एनडीए ने झारखंड आंदोलन के लिए विपक्ष को बताया जिम्मेदार, कहा-छात्रों के साथ हिंसा पर चुप क्यों हैं राहुल

नई दिल्ली। झारखंड विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद के भीतर और बाहर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एनडीए के सांसदों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडी अलायंस ब्लॉक पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि विपक्ष झारखंड में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर चुप क्यों है। सांसदों ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया और राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं तथा भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने झारखंड में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि झारखंड में बच्चों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर राहुल गांधी खामोश क्यों हैं। रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि राज्य में परीक्षाओं के दौरान नौकरियां बेचे जाने और बिचौलियों के प्रभाव की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि कथित परीक्षा घोटालों की केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच होने पर सच्चाई सामने आ सकती है।

रविशंकर प्रसाद ने संसद में विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की हर बात सुनने और प्रत्येक बिंदु पर जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को भी सत्ता पक्ष की बात सुननी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि झारखंड में सरकार कांग्रेस के समर्थन से चल रही है और ऐसे में वहां छात्रों के आंदोलन, भूख हड़ताल, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर कांग्रेस की क्या जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि एक ओर संसद में राहुल गांधी और विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर झारखंड में छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई हो रही है।

संसद में हंगामे पर भाजपा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा,"राहुल गांधी और विपक्ष एकदम बैकफुट पर आ गया है जब से झारखंड में आंदोलन शुरू हुआ है तो उन्हीं को लेने के देने पड़े रहे हैं और उसके बाद वे लोग हतोत्साहित हो गए हैं। हम लोग ने कहा तो कि आप आए और चर्चा कीजिए। इन्होंने पूरा मानसून सत्र वॉशआउट कर दिया। तो मैं आप सभी से आग्रह करना चाहता हूं कि अगर राजनीति करना है तो सड़कों पर मत करिए। आपको राजनीति करनी है तो आप अपनी बात संसद में रखिए। जनता की बात नहीं रखेंगे तो वही हाल होगा जो पहले हुआ है जनता आपको रिजेक्ट कर देगी।"

शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा, "मेरा मानना ​​है कि झारखंड में जो हुआ वह गलत था। हमारे छात्रों के साथ सम्मान से पेश आना चाहिए। वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे और देश झारखंड में उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पर ध्यान दे रहा है। राहुल गांधी ने कहा है कि वे इस घटना और छात्रों पर हुए किसी भी अत्याचार का विरोध करते हैं। अगर वे सच में इसका विरोध करते हैं, तो उन्हें सरकार के इस्तीफे की मांग करनी चाहिए और अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए।"

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने झारखंड की कांग्रेस-जेएमएम सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों और बेटियों के साथ कथित तौर पर जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी को इसके राजनीतिक परिणाम भुगतने होंगे। मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी दिल्ली में बड़े-बड़े दावे करते हैं लेकिन झारखंड में छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर कांग्रेस की सरकार से सवाल नहीं पूछते।

केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने भी राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई हुई, उसने सारी हदें पार कर दीं। सेठ ने हेमंत सोरेन सरकार पर "दबाने की नीति" अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।

भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब राहुल गांधी केंद्रीय गृह मंत्री से संसद में जवाब मांग रहे हैं, उसी समय रांची में छात्रों पर लाठीचार्ज की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। पाल ने कहा कि कांग्रेस को झारखंड में हुई घटना पर जवाब देना चाहिए।

सांसद भागीरथ चौधरी ने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद की कार्यवाही को बाधित कर रहा है और उसके पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष कभी एक मुद्दा उठाता है और अगले दिन दूसरा मुद्दा सामने ले आता है। उनके मुताबिक, सदन को सुचारू रूप से चलाना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है, ताकि जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सके और समाधान निकाला जा सके।

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