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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:10 · नई दिल्ली संस्करण

बीएचयू में 200 से अधिक दृष्टिबाधित विद्यार्थी अध्ययनरत्,पुस्तकें ऑडियो फार्मेट में तैयार

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बीएचयू में 200 से अधिक दृष्टिबाधित विद्यार्थी अध्ययनरत्,पुस्तकें ऑडियो फार्मेट में तैयार

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू)में 200 से अधिक दृष्टिबाधित विद्यार्थी अध्ययनरत है। इन विद्यार्थियों के अध्ययन में परिसर स्थित सयाजी राव गायकवाड़ केन्द्रीय ग्रंथालय (लाईब्रेरी)बड़ा सहायक है।ग्रंथालय में दृष्टिबाधित डिजिटल लाइब्रेरी सेवा इन छात्रों के लिए तैयार किया गया है। यहां किबो स्कैनर की मदद से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए पुस्तकों को ऑडियो फार्मेट में तैयार कर नि:शुल्क उन्हें मुहैया कराया जाता है। इसके अंतर्गत अब तक कुल 600 से अधिक पुस्तकों को ऑडियो फार्मेट में तैयार किए जा चुके हैं। इसके साथ ही इन विद्यार्थियों को ब्रेल लिपि में पुस्तकों को भी प्रिंट कर निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। यह जानकारी केन्द्रीय ग्रंथालयी डॉ. डी. के. सिंह ने कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी को दी।ग्रंथालय में पहुंचे कुलपति ने यहां उपलब्ध सुविधाओं का शनिवार जायज़ा लिया। पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. डी. के. सिंह ने यहां उपलब्ध ऐतिहासिक और दुर्लभ पाण्डुलिपियों के बारे में अवगत कराया।इस दौरान कुलपति ने कहा कि केन्द्रीय ग्रंथालय विश्वविद्यालय और विद्यार्थियों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है। उन्होंने विद्यार्थी सुविधाओं के उन्नयन की दिशा में पुस्तकालय के प्रयासों और प्रगति की सराहना की।उन्होंने सुझाव दिया कि तकनीक के वृहद इस्तेमाल से ग्रंथालय को और आधुनिक व विद्यार्थी अनुकूल बनाने पर कार्य करना होगा। कुलपति ने केन्द्रीय ग्रंथालय के पाण्डुलिपि अनुभाग में संरक्षित पांडुलिपियों का भी अवलोकन किया। अनुभाग के कंजरवेटर संजय कुमार ने कुलपति को ग्रंथालय में उपलब्ध विभिन्न ऐतिहासिक और दुर्लभ पाण्डुलिपियों के बारे में अवगत कराया।कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय में उपलब्ध दुर्लभ और समृद्ध साहित्यितक एवं शैक्षिक विरासत के बारे में दुनिया को पता चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी दुर्लभ कृतियों का कैटलॉग बीएचयू की वेबसाइट पर उपलब्ध कराने से इसकी शुरुआत की जा सकती है ताकि देश-विदेश के शोधकर्ताओं को इसकी जानकारी मिल सके। बताया गया कि विश्वविद्यालय में कुल 12,500 से अधिक पाण्डुलिपियां मौजूद हैं जिनमें से 7,281 पाण्डुलिपि केन्द्रीय ग्रंथालय में संरक्षित है। केन्द्रीय ग्रंथालय में नवीनतम सुविधा आरएफआईडी की भी औपचारिक शुरूआत हो गई है। अब विद्यार्थियों को पुस्तकें निर्गत कराने और जमा करने के लिए लंबी पंक्तियों से निजात मिल जाएगी। केन्द्रीय ग्रंथालय में हर रोज़ सैकड़ों विद्यार्थी पुस्तकें जमा और निर्गत कराने आते हैं।

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