लोक कला से सराबोर होगा मोरहाबादी मैदन,पहली बार बजेगा केंदरा
रांची। झारखंड सरकार का एक साल पूरा होने जा रहा है। इसकी तैयारियां मोरहबादी मैदान में कर ली गई है। मंच को चार चांद लगाने के लिए अंतरराष्ठीय लोक कलकार नन्दलाल नायक अपनी टीम के साथ ब्लूज और फोक की जुगलबंदी से नया संगीत की प्रस्तुती पेश करेंगे। इस आयेाजन में नगाड़ा की गुंज,ढ़ोल-मांदर की थाप के साथ की- पैड, गिटार तो बजेगा ही। लेकिन टूहिला, भेर,बांसुरी,भैंसा का सींग और एक तारा से भी रागो को छेड़ जायेगा। वहीं इस आयोजन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के एक साल अबुआ राज के पूरा होने पर पहली बार केंदरा की कर्णप्रिया धून भी सुनाई देगी। विलुप्त होता केंदरा मुंडाओं को सबसे कर्ण प्रिया वाद्य यंत्र हुआ करता था। इस केंदरा को बनाम को पंचानन मुंडा अपने हाथों से छेड़ेंगे।
क्या है केंदरा: नन्दलाल नायक ने राष्ट्रीय सागर संवाददाता परवेज कुरैशी को बताया कि यह मुंडाओं का लोकप्रिय वाद्ययंत्र है जो विलुप्त हो चुका है। जिसे हमने खोज निकाले है । वहीं वाद्य यंत्र को बजाने वाले कलाकर पंचनन मुंडा ने बताया कि इस वाद्य यांत्र को बनाम भी कहते है। यह मृत कछुआ के पीठ और बड़ा गिरगिट मृत के खाल को सिलगा गोंद से बांस में चिपा कर बनाया जाता है। वहीं बांस के स्टीक जिसमें घोड़ा के पूंछ की बाल लगी है उसी के सहारे बांस में लगे तार पर जब घर्षण होता है उसके बाद ही मर्धुर धुन निकलता है।





